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बिहार : सुप्रीम कोर्ट में जन सुराज की याचिका, फिर से चुनाव की मांग तेज

Munesh Kumar Shukla Thu, Feb 5, 2026

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के परिणामों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए चुनाव को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। पार्टी ने यह कदम चुनावी प्रक्रिया और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाने के बाद उठाया है। जन सुराज पार्टी की याचिका में मुख्य आरोप है कि राज्य सरकार ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) लागू रहने के दौरान मतदाताओं को सीधे 10,000 की राशि ट्रांसफर की, जो चुनाव को प्रभावित करने वाला अवैध भुगतान है। पार्टी का कहना है कि इस तरह के फायदे वोटरों को चुनाव के ठीक पहले दिए गए और इससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हुई। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे इस तरह के “भ्रष्ट आचार” के खिलाफ कार्रवाई करें और चुनावी परिणाम रद्द करने का आदेश दें। जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी मांग की है कि अगर अदालत इन आरोपों को सही पाती है, तो 2025 के विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से मतदान सुनिश्चित किया जाए। जन सुराज पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा चुनाव से पहले जारी की गई वित्तीय सहायता केवल महिलाओं को समर्थ बनाने के उद्देश्य से नहीं थी बल्कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक रणनीति थी। याचिका में यह तर्क भी शामिल है कि इस तरह की वित्तीय हस्तांतरणों का चुनाव के दौरान होना चुनाव कानून और MCC के खिलाफ है। हालांकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामला सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने रखा जाएगा, जिसमें पार्टी की मांग और चुनाव आयोग की भूमिका पर विचार किया जाएगा। यदि कोर्ट याचिका को स्वीकार करती है, तो यह बिहार की राजनैतिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकता है। पार्टी की यह कानूनी चुनौती उस पृष्ठभूमि में आई है जब जन सुराज पार्टी 2025 के चुनावों में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं। इस चुनावी असफलता के बाद पार्टी ने नतीजों को चुनौती देना शुरू कर दिया है। पार्टी का दावा है कि जनता की आवाज़ को न्याय के ज़रिये उठाया जा रहा है और यदि अदालत आवश्यक दिशा निर्देश देती है तो भविष्य में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और MCC या अन्य आचार संहिता नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं। जन सुराज का कहना है कि यह मामला केवल एक चुनाव का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।पार्टी ने यह भी जोर दिया कि अदालत का हस्तक्षेप भविष्य के चुनावों के लिए एक सख्त उदाहरण स्थापित कर सकता है।पार्टी का दावा है कि जनता की आवाज़ को न्याय के ज़रिये उठाया जा रहा है और यदि अदालत आवश्यक दिशा-निर्देश देती है तो भविष्य में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने तथा एमसीसी या अन्य आचार संहिता नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। जन सुराज का कहना है कि यह मामला केवल एक चुनाव का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। पार्टी ने यह भी ज़ोर दिया कि अदालत का हस्तक्षेप भविष्य के चुनावों के लिए एक सख्त उदाहरण स्थापित कर सकता है।