कश्मीर में ‘ईरान की जीत’ का जश्न! : युद्धविराम के बाद सड़कों पर उतरे लोग
Wed, Apr 8, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद कश्मीर घाटी में कई जगहों पर जश्न का माहौल देखने को मिला। खासकर शिया बहुल इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और इस घटनाक्रम को ईरान की “जीत” बताया।
श्रीनगर के सैदाकदल और जदीबल क्षेत्रों के अलावा बडगाम, बारामूला, गांदरबल, पुलवामा और बांदीपोरा जिलों में भी लोग इकट्ठा होकर खुशी मनाते नजर आए।
लोगों ने ईरानी झंडे लहराए, पटाखे फोड़े और एक-दूसरे को कश्मीरी कहवा बांटकर जश्न मनाया। कई लोगों का कहना था कि यह संघर्षविराम अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान की बड़ी जीत है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि ईरान ने इस संघर्ष में अमेरिका और इजराइल को झुकने पर मजबूर कर दिया, इसलिए यह जश्न मनाया जा रहा है। वहीं, कुछ कश्मीरी नेताओं ने भी युद्धविराम का स्वागत करते हुए सवाल उठाया कि इस संघर्ष से अमेरिका को आखिर क्या हासिल हुआ।
इससे पहले भी घाटी में ईरान के समर्थन में बड़े स्तर पर फंड जुटाने के अभियान चलाए गए थे, जिसमें लोगों ने आर्थिक और अन्य तरह की मदद दी थी।
गौरतलब है कि कश्मीर और ईरान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक जुड़ाव रहा है। इसी कारण कश्मीर को अक्सर ‘ईरान-ए-सगीर’ यानी “छोटा ईरान” भी कहा जाता है।
जम्मू यूनिवर्सिटी : जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना को लेकर नया विवाद सामने आया है
Mon, Mar 23, 2026
जम्मू यूनिवर्सिटी में एमए पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस को लेकर नया विवाद सामने आया है। विभागीय मामलों की समिति (DAC) ने मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से जुड़े टॉपिक्स को हटाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला 24 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में लिया जाएगा।
दरअसल, पॉलिटिकल साइंस के ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ पेपर में जिन्ना के राजनीतिक विचारों को शामिल किए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ। इसको लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करते हुए इन विषयों को हटाने की मांग की। संगठन का कहना है कि अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
ABVP के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स के मुताबिक, पहले जिन्ना का उल्लेख ‘टू-नेशन थ्योरी’ के संदर्भ में किया जाता था, जहां उन्हें विभाजन की विचारधारा से जोड़ा जाता था। लेकिन संशोधित सिलेबस में उन्हें ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ के तहत अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिस पर आपत्ति जताई जा रही है।
वहीं, पॉलिटिकल साइंस विभाग के अध्यक्ष बलजीत सिंह मान ने कहा कि जिन्ना समेत अन्य विचारकों को पूरी तरह अकादमिक दृष्टिकोण से सिलेबस में शामिल किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित ढांचे और UGC के मानकों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य छात्रों को विभिन्न विचारधाराओं से परिचित कराना है।
बढ़ते विवाद के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक समिति भी गठित की है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को अनावश्यक विवाद बताते हुए कहा है कि सिलेबस को लेकर जानबूझकर माहौल बनाया जा रहा है।