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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गाली-गलौज को ‘अश्लीलता’ नहीं माना जाएगा

Munesh Kumar Shukla Wed, Apr 8, 2026

एक अहम आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को स्पष्ट किया कि गरमागरम बहस के दौरान बोले गए अपशब्द, जैसे “बास***ड”, अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294 के तहत अश्लीलता नहीं माने जाएंगे।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि किसी शब्द को अश्लील मानने के लिए उसमें यौन या कामुक तत्व होना जरूरी है। केवल अपशब्दों का इस्तेमाल इस श्रेणी में नहीं आता।

अदालत ने यह भी कहा कि “बेशर्म” जैसे शब्द किसी की कामुक भावना को उकसाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, खासकर जब आज के समय में ऐसे शब्द बहस के दौरान आम हो चुके हैं। इस आधार पर कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की सजा को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि IPC में “अश्लील” शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। हालांकि, धारा 292 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अश्लीलता वही मानी जाएगी जो किसी व्यक्ति की कामुक रुचि को आकर्षित करे।

अपोर्व अरोरा बनाम राज्य मामला का जिक्र करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि अश्लीलता का संबंध केवल यौन उत्तेजना से है, न कि ऐसी भाषा से जो सिर्फ आपत्तिजनक या असभ्य लगे।

अदालत ने साफ किया कि भले ही अपशब्दों का इस्तेमाल असभ्य और अनुचित हो सकता है, लेकिन इसे केवल इसी आधार पर ‘अश्लीलता’ नहीं कहा जा सकता।