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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: : ‘मृत बेटी होने से बेहतर है तलाकशुदा होना’

Munesh Kumar Shukla Tue, May 26, 2026

सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने भोपाल की एक्टर और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद अहम टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि एक बेटी का जिंदा और सुरक्षित रहना अधिक महत्वपूर्ण है, बजाय इसके कि उसे किसी असफल शादी में जबरन बांधकर रखा जाए। सुनवाई के दौरान दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस हुई। न्यायालय ने कहा कि कई परिवार केवल सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए बेटियों को हिंसक रिश्तों में रहने के लिए मजबूर करते हैं, जो अंततः त्रासदी का कारण बनता है। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, विवाह संस्था में बढ़ते तनाव और समाज की मानसिकता पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश बन सकती है। वहीं महिला संगठनों ने भी कोर्ट के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि बेटियों को आत्मसम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए।