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मणिपुर हिंसा पीड़ितों को राहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : 24 हजार परिवारों के दावों की जांच के आदेश

Munesh Kumar Shukla Mon, Aug 10, 2026

मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने अपनी ओर से गठित तीन सदस्यीय कमिटी को उन दावों की जांच करने का निर्देश दिया, जिनमें कहा गया है कि हिंसा से प्रभावित करीब 24 हजार परिवारों को अब तक सरकारी पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस समेत कई वकीलों ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में प्रभावित आदिवासी परिवार अभी भी सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं से वंचित हैं।

कोर्ट ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर भी गौर किया। अदालत को बताया गया कि घर बनाने के लिए करीब 7 हजार लाभार्थियों की पहचान की गई थी, जिनमें से 4 हजार से अधिक लोगों को फंड जारी किया जा चुका है। सरकारी योजना के तहत कच्चे मकान के लिए 5 लाख रुपये और सेमी-पक्का या पक्का मकान बनाने के लिए 7 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल कमिटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्त मखीजा की दलीलों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट को बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत हिंसा प्रभावित परिवारों के लिए 12 हजार से अधिक घरों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा अस्थायी शेल्टर बनाए गए हैं और पक्के मकानों के लिए चिन्हित 885 लाभार्थियों को करीब 51.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

अदालत ने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रति परिवार एक लाख रुपये की सहायता भी दी गई है। हालांकि, करीब 24 हजार परिवारों के लाभ से वंचित होने के दावे को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कमिटी से जमीनी स्तर पर इसकी पुष्टि करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने संपत्तियों से जुड़े मामलों को भी जस्टिस मित्तल की अध्यक्षता वाली कमिटी को भेजने का निर्देश दिया। कमिटी संपत्तियों की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी। पूजा स्थलों को हुए नुकसान के मामले में भी 276 संपत्तियों की सूची की जांच करने को कहा गया है।