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ट्रांसजेंडर सुरक्षा कानून : राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बढ़ी सियासी बहस

Munesh Kumar Shukla Wed, Apr 1, 2026

द्रौपदी मुर्मू ने ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है, जिससे यह अब कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। कानून मंत्रालय ने 30 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ शारीरिक हिंसा करने वालों के लिए “क्रमिक दंड” (Graduated Penalties) लागू करना है, ताकि अपराध की गंभीरता के अनुसार सख्त सजा दी जा सके।

विधेयक में एक अहम प्रावधान यह भी है कि किसी व्यक्ति के ट्रांसजेंडर होने का निर्धारण करने के लिए एक विशेष प्राधिकरण (Authority) बनाया जाएगा। हालांकि, इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे आत्म-पहचान के अधिकार में दखल बताया है।

विपक्षी सांसदों ने यह भी आलोचना की है कि इस कानून में समलैंगिक पुरुष (गे) और महिलाएं (लेस्बियन) शामिल नहीं हैं, जिससे यह कानून सीमित दायरे में रह जाता है। उनका कहना है कि इससे LGBTQ+ समुदाय के अन्य वर्गों को सुरक्षा नहीं मिल पाएगी।

संसद में हुई बहस के दौरान सरकार ने साफ किया कि इस कानून का उद्देश्य विशेष रूप से उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुरक्षा करना है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर गंभीर भेदभाव का सामना करते हैं। वहीं विपक्ष ने मांग की कि इस विधेयक को और व्यापक चर्चा के लिए स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए।

नए कानून के अनुसार, “ट्रांसजेंडर” की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है और इसमें “विभिन्न यौन अभिविन्यास और स्व-परिकल्पित लैंगिक पहचान” को शामिल नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून एक विशेष सामाजिक वर्ग की सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि विपक्ष इसे अधिकारों को सीमित करने वाला कदम मान रहा है।