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लाल सागर में हूथी हमला : सऊदी तेल टैंकर बने निशाना

Munesh Kumar Shukla Thu, Jul 23, 2026

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। यमन के हूथी विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले की जिम्मेदारी ली है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र पहले से ही ईरान-अमेरिका तनाव, गाजा संघर्ष और समुद्री सुरक्षा संकट के कारण बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी उद्योग की चिंता को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार हमला लाल सागर के उस हिस्से में हुआ जो बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के बेहद करीब माना जाता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक गलियारों में शामिल है, क्योंकि एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में तेल, गैस और अन्य सामान इसी रास्ते से गुजरते हैं। यदि यहां सुरक्षा संकट गहराता है, तो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ सकता है।

हूथी विद्रोही लंबे समय से यमन में सक्रिय हैं और उन पर पहले भी तेल प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। हाल के महीनों में लाल सागर क्षेत्र में कई हमलों और ड्रोन गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सैन्य तैनाती की है। इसके बावजूद हमलों का सिलसिला पूरी तरह थमता नहीं दिख रहा।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल टैंकरों पर हमले का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता। जैसे ही समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है, बीमा कंपनियां प्रीमियम बढ़ा देती हैं और जहाजरानी कंपनियों की लागत में इजाफा हो जाता है। इसका असर अंततः वैश्विक तेल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया से होने वाली आपूर्ति देश की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाती है।