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श्रीलंका : ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला हिंद महासागर में सैन्य और कूटनीतिक तनाव बढ़ा

Munesh Kumar Shukla Fri, Mar 6, 2026

श्रीलंका की संसद में उठे सवालों ने हिंद महासागर में सैन्य और कूटनीतिक तनाव की परतें उजागर की; अमेरिकी टारपीडो हमले ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ाई श्रीलंका की संसद में गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि क्या अमेरिकी हमले का शिकार ईरानी युद्धपोत “डेना” काफी समय से श्रीलंका के जल क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मांग रहा था। एसजेबी सांसद मुजीबुर रहमान ने दावा किया कि जहाज को गाले बंदरगाह से लगभग चालीस समुद्री मील दूर ग्यारह घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अमेरिका और भारत के दबाव में सरकार ने जहाज को प्रवेश देने में देरी की।विपक्षी नेता सजित प्रेमदासा ने कहा कि कोलंबो के पास एक और ईरानी जहाज की मौजूदगी ने स्थिति और संवेदनशील बना दी। वहीं श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्स ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और हालात सामान्य होने पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।वास्तव में विवाद तब भड़का जब अमेरिकी पनडुब्बी ने बुधवार सुबह दक्षिणी तट के पास ईरानी युद्धपोत डेना पर दो एमके-48 टारपीडो दागे। पहला टारपीडो चूक गया, लेकिन दूसरा जहाज से टकराया और डेना समुद्र में डूब गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हमले की पुष्टि की। इस हमले ने संकेत दिया कि अमेरिका-ईरान तनाव अब हिंद महासागर में खुले समुद्री टकराव तक पहुंच चुका है। श्रीलंका को सुबह पांच बजकर आठ मिनट पर संकट संदेश मिला। भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान में सक्रियता दिखाई, लंबी दूरी के गश्ती विमान और जीवन रक्षक नौकाओं से लैस विमान भेजे। ईरान का दूसरा युद्धपोत बुशेहर भी बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति का इंतजार करता रहा। अंततः श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके ने 208 कर्मियों को कोलंबो बंदरगाह पर उतारने और जहाज को त्रिंकोमाली ले जाने का निर्णय लिया। यह घटना केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि हिंद महासागर में बदलते शक्ति संतुलन और वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़े खतरे का संकेत है।