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पश्चिम बंगाल में दो होटल अग्निकांडों से मचा हड़कंप : कोलकाता और तारापीठ में 18 लोगों की मौत

Munesh Kumar Shukla Wed, Aug 19, 2026

पश्चिम बंगाल में लगातार दो दिनों के भीतर हुए दो बड़े होटल अग्निकांडों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी कोलकाता और बीरभूम जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तारापीठ में अलग-अलग होटलों में आग लगने की घटनाओं में कुल 18 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। लगातार हुई इन घटनाओं के बाद प्रशासन और अग्निशमन विभाग में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के मुताबिक, कोलकाता में एक होटल में अचानक आग लगने के बाद देखते ही देखते धुआं और लपटें पूरे परिसर में फैल गईं। होटल में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की और होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

इसी दौरान बीरभूम जिले के तारापीठ में भी एक होटल में आग लगने की घटना सामने आई। धार्मिक स्थल होने के कारण तारापीठ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। होटल में आग लगने के बाद वहां भी भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बचाव दल ने प्रभावित लोगों को बाहर निकालने का अभियान चलाया।

दोनों घटनाओं में कई लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों की कुल संख्या 18 तक पहुंच गई है। अधिकारियों ने मृतकों की पहचान और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि कुछ होटल मेहमान बांग्लादेशी नागरिक भी थे, जो इलाज के सिलसिले में कोलकाता आए हुए थे।

हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। पुलिस और अग्निशमन विभाग यह जांच कर रहे हैं कि संबंधित होटलों में आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे या नहीं। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि क्या होटल प्रबंधन ने अग्निशमन नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया था।

जांच एजेंसियां होटल के फायर एग्जिट, आपातकालीन रास्तों, अग्निशमन उपकरणों और बिजली के कनेक्शन समेत कई पहलुओं की जांच कर रही हैं। यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आती है तो होटल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

लगातार दो बड़े अग्निकांडों ने राज्य में होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होटल जैसे स्थानों पर आग लगने की स्थिति में समय पर निकासी के लिए पर्याप्त आपातकालीन रास्ते और प्रशिक्षित स्टाफ बेहद जरूरी होते हैं।

फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग दोनों घटनाओं की विस्तृत जांच में जुटे हैं। प्रशासन मृतकों के परिजनों को सूचना देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था में लगा हुआ है। इन हादसों के बाद राज्य में होटल सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा किए जाने की मांग भी उठ सकती है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि इन दर्दनाक घटनाओं के पीछे तकनीकी खामी थी, लापरवाही थी या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन।