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कांग्रेस : एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Munesh Kumar Shukla Sat, Mar 7, 2026

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने शनिवार को एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया वृद्धि को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की कड़ी आलोचना की। घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में आज, 7 मार्च से वृद्धि की गई है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़ाकर 913 रुपये कर दी गई है, जबकि मुंबई में यह दर 852.50 रुपये से बढ़कर 912.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में कीमत 879 रुपये से बढ़कर 909 रुपये हो गई है, और चेन्नई में यह 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है। व्यावसायिक उपयोग वाले 19 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसका मूल्य 1768.50 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गया है, मुंबई में 1720.50 रुपये से 1835 रुपये, कोलकाता में 1875.50 रुपये से 1990 रुपये और चेन्नई में 1929 रुपये से 2043.50 रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उन व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण आर्थिक असर रखती है, जो रोजमर्रा के कार्यों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। पवन खेड़ा ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कहा कि शुक्रवार को हरदीप सिंह पुरी ने यह दावा किया था कि सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए किफायती और टिकाऊ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। पुरी ने कहा था कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद उपभोक्ताओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पवन खेड़ा ने इस बयान के तुरंत बाद कहा कि अगले ही दिन घरेलू एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में 115 रुपये की वृद्धि हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के दावों पर विश्वास नहीं किया जा सकता।विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में घरेलू एलपीजी की कीमत अप्रैल 2025 के बाद से स्थिर थी, जब गैर-सब्सिडी वाली दर 853 रुपये निर्धारित की गई थी। अब हुई वृद्धि ने उपभोक्ताओं के लिए घरेलू बजट और व्यावसायिक लागतों पर सीधा असर डाला है। इस बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे आम जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है। राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेज बहस का विषय बन गया है, क्योंकि जनता की रोजमर्रा की आवश्यकताओं से जुड़े ऐसे कदम अक्सर संवेदनशील प्रतिक्रिया को जन्म देते हैं।

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