कांग्रेस : नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव पर कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
Munesh Kumar Shukla Fri, Mar 6, 2026
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया; कांग्रेस और जेडीयू कार्यकर्ताओं में प्रतिक्रिया अलग-अलग, राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन उभरे।बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा मोड़ देखने को मिला, जब राज्य के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने नए मंत्रिमंडल को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार ने 2025 में पांचवीं बार विधानसभा चुनाव जीतकर एनडीए की दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार बनाई थी और इस दौरान दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नीतीश कुमार के 2026 के राज्यसभा चुनाव में भाग लेने पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी। रमेश ने कहा कि बिहार चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं ने बार-बार यह कहा था कि नीतीश कुमार राज्य में लंबे समय तक नहीं टिकेंगे। उन्होंने इसे जनता के भरोसे के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह जनादेश केवल नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए था। रमेश ने इसको अमेरिका और वेनेजुएला के उदाहरण से जोड़ते हुए कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक विश्वास के लिए चिंता का विषय है।रमेश ने आगे आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपने लिए वोट मांगे, अपने बेटे या किसी अन्य के लिए नहीं। उन्होंने भारतीय राजनीति में बढ़ती पार्टी केंद्रित ताकत और राज्यपालों के राजनीतिक हस्तक्षेप की भी आलोचना की। उनका कहना था कि अब राज्यपालों की भूमिका पूरी तरह से राजनीतिक हो गई है, जबकि पहले वह निष्पक्ष होते थे।इस बीच जेडीयू समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई जानकारी पर संदेह जताया और कहा कि यह सही नहीं हो सकता। एक कार्यकर्ता ने कहा कि नीतीश कुमार जनता के जनादेश का अपमान नहीं कर सकते और उन पर भारी राजनीतिक दबाव है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की जनता उन्हें परिवार मानती है और मुख्यमंत्री पद पर कोई और नहीं होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना जेडीयू के भीतर उत्तराधिकार और नेतृत्व परिवर्तन के सवाल को नई दिशा देगा। यह स्थिति बिहार की राजनीति में नए समीकरण और गहन चर्चाओं को जन्म दे रही है, जिसमें पार्टी के अंदर और बाहर कई गुटों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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