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कच्चा तेल बना ‘महंगाई बम’! : चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 तक महंगा होने की आशंका

Munesh Kumar Shukla Tue, Apr 14, 2026

कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म Macquarie Group की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी स्थिर हैं, लेकिन तेल कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल पर करीब ₹18 और डीजल पर ₹35 का नुकसान हो रहा है। पिछले महीने जब कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्च स्तर पर थीं, तब सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग ₹2,400 करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा था। हालांकि एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद यह नुकसान घटकर ₹1,600 करोड़ प्रतिदिन रह गया है। अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब ₹6 और बढ़ जाता है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश का चालू खाता घाटा (CAD) 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा, सरकार को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में जहां एक्साइज ड्यूटी का योगदान 22% था, वह अब घटकर सिर्फ 8% रह गया है। यहां तक कि अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी भी हटा दे, तब भी तेल कंपनियों का मौजूदा घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

वैश्विक स्तर पर भी ईंधन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। United States में पेट्रोल की कीमत अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है। वहीं Pakistan, Nepal और Sri Lanka जैसे पड़ोसी देशों में भी पेट्रोल-डीजल महंगे हो चुके हैं।

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