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महिला आरक्षण : महिला आरक्षण पर संसद से पहले सियासी घमासान

Munesh Kumar Shukla Mon, Apr 13, 2026

संसद के विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने इस विषय पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का सिद्धांततः समर्थन करती है, लेकिन सरकार इसे ईमानदारी से लागू करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। खरगे ने इसे “पॉलिटिकल स्टंट” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को केवल चुनावी फायदे के लिए उछाल रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने 15 अप्रैल को होने वाली सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि उसमें सभी पक्ष अपनी राय रखेंगे और एक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। खरगे के अनुसार, यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है, तो उसे पारदर्शिता और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस विधेयक को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है। सरकार का दावा है कि महिला आरक्षण के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी। सरकार के समर्थकों का मानना है कि यह कदम लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करता है और इससे देश में सामाजिक संतुलन और समानता को बढ़ावा मिलेगा।

इस मुद्दे ने संसद सत्र से पहले ही राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। एक ओर जहां विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इस विषय पर मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह तय है कि संसद के आगामी सत्र में इस पर तीखी बहस होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल नीति का सवाल नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव वाला विषय है, जो आने वाले चुनावों में भी अहम भूमिका निभा सकता है।