संसद में महिला आरक्षण पर महाभारत! : शाह vs अखिलेश, ‘मुस्लिम महिलाओं’ पर छिड़ी तीखी जंग
Munesh Kumar Shukla Thu, Apr 16, 2026
16 अप्रैल से शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े बिल पेश होते ही सियासी माहौल गरमा गया। Parliament of India में सरकार ने तीन अहम विधेयक पेश किए, जिनका लक्ष्य 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना और लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करना है।
जैसे ही बिल पेश हुआ, विपक्ष ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। Indian National Congress ने सबसे पहले सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह कदम संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ करने जैसा है।
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद Dharmendra Yadav ने बहस को नया मोड़ देते हुए कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया, तो ऐसे आरक्षण का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
इस पर Amit Shah ने कड़ा जवाब देते हुए साफ कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और ऐसा संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद सदन में बहस और तेज हो गई।
सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन सभी वर्गों की महिलाओं को बराबरी से शामिल करना जरूरी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी ‘नारी’ को सिर्फ एक नारे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पंचायत स्तर पर सबसे ज्यादा महिला आरक्षण उनकी सरकार ने दिया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी यह सब जल्दबाजी में इसलिए कर रही है ताकि जनगणना, खासकर जातीय जनगणना, को टाला जा सके।
जवाब में अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को इतनी चिंता है, तो वे अपने चुनावी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकते हैं—सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है।
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