भोपाल में ‘जेन अल्फा’ का हल्लाबोल : KVS में विलय के फैसले के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन
Munesh Kumar Shukla Wed, Aug 19, 2026
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल यानी DMS के छात्रों ने अपने स्कूल के प्रस्तावित विलय के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। रीजनल स्कूल के नाम से पहचाने जाने वाले इस संस्थान को केंद्रीय विद्यालय संगठन यानी KVS में शामिल किए जाने के प्रस्ताव ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूल से जुड़े लोगों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। बुधवार को छात्रों ने स्कूल परिसर के बाहर प्रदर्शन करते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और अपने स्कूल को मौजूदा स्वरूप में बनाए रखने की मांग उठाई। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर विरोध करते नजर आए। छात्रों का कहना है कि स्कूल की अपनी अलग पहचान और शैक्षणिक व्यवस्था है, जिसे किसी दूसरे संगठन में विलय करने से उसकी मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन को ‘जेन अल्फा’ छात्रों की आवाज के रूप में देखा जा रहा है। नई पीढ़ी के छात्रों ने सोशल मीडिया और सामूहिक प्रदर्शन के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। छात्रों का कहना है कि उनके भविष्य से जुड़े फैसले लेने से पहले उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्कूल के विलय को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से चर्चा की जाए।
DMS भोपाल का शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। स्कूल को रीजनल स्कूल के तौर पर भी जाना जाता है और यहां पढ़ने वाले छात्रों तथा पूर्व छात्रों की बड़ी संख्या है। ऐसे में स्कूल के KVS में विलय के प्रस्ताव ने संस्थान से जुड़े लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
छात्रों का विरोध सिर्फ विलय के फैसले तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि स्कूल की पहचान, शिक्षण पद्धति, सुविधाओं और भविष्य की शैक्षणिक दिशा को लेकर भी कई सवाल हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार पूरे मामले में पारदर्शिता बरते और प्रस्तावित विलय से होने वाले संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक करे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने की कोशिश की। मामले के बढ़ने के बाद अब प्रशासन और शिक्षा विभाग के रुख पर सबकी नजर है। यदि छात्रों की मांग पर जल्द कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो विरोध आगे भी बढ़ सकता है।
विज्ञापन