CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : सेना के अस्पतालों की हालत खराब,जवानों को समय पर नहीं मिला वेतन
Munesh Kumar Shukla Tue, Mar 31, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से मेंटेन नहीं किए गए, जिससे काम की गुणवत्ता और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो गया। CAG ने सुझाव दिया है कि इन रिकॉर्ड्स को डिजिटल किया जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
वहीं, प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समय पर समीक्षा न होने के कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और अन्य कर्मियों से एकमुश्त बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल न होने से कई जवानों को उनका वेतन और भत्ता समय पर नहीं मिल पाया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी हो रही है और HRMS सिस्टम में गड़बड़ी के कारण कई आवेदन खारिज हो रहे हैं। CAG ने अलग-अलग सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाने की सिफारिश की है।
इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में भी कई खामियां पाई गईं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। कुछ जगहों पर HVAC और फायरफाइटिंग सिस्टम अधूरे पाए गए।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) जरूरत के अनुसार दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पाया। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। साथ ही, दो डिपो में दवाओं को समय पर नहीं बदला गया, जिससे करीब 13.52 करोड़ रुपये की दवाएं अटकी रहीं।
यह रिपोर्ट सेना की प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की तत्काल जरूरत को उजागर करती है।
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