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अरविंद केजरीवाल : “ये जज मंजूर नहीं” —हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अरविंद केजरीवाल

Munesh Kumar Shukla Mon, Mar 16, 2026

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मामले को किसी दूसरे जज को सौंपने की मांग खारिज कर दी गई थी।

दरअसल, केजरीवाल और सिसोदिया ने 11 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को आवेदन देकर मांग की थी कि सीबीआई की याचिका को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ से हटाकर किसी अन्य जज को सौंपा जाए। उन्होंने मामले की सुनवाई को लेकर निष्पक्षता पर “गंभीर आशंका” जताई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि मामले का सूचीबद्ध होना अदालत की नियमित प्रक्रिया के अनुसार है और इसे स्थानांतरित करने का कोई प्रशासनिक आधार नहीं है।

गौरतलब है कि सीबीआई ने 27 फरवरी को निचली अदालत द्वारा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला 2021 की दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें शराब लाइसेंस देने में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे।

दिल्ली सरकार की यह नीति बाद में रद्द कर दी गई थी। इस मामले में उपराज्यपाल के आदेश पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू की थी। निचली अदालत ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

हालांकि 9 मार्च को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया और निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों में पहली नजर में त्रुटियां होने की बात कही। इसके साथ ही सीबीआई जांचकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी गई और संबंधित पीएमएलए कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई।

इन घटनाक्रमों के बाद आम आदमी पार्टी ने मामले में पक्षपात की आशंका जताई है और अब इस मुद्दे पर अंतिम राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।