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Munesh Kumar Shukla Wed, Apr 8, 2026

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने SIR से जुड़े मुद्दे पर शिकायत दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग का रुख किया, लेकिन मुलाकात के दौरान कथित व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

तृणमूल सांसदों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें अपनी बात जल्दी खत्म कर बाहर जाने के लिए कहा। सांसदों के मुताबिक, उन्हें “सात मिनट में अपनी बात कहो और चले जाओ” जैसी टिप्पणी सुननी पड़ी, जिससे वे नाराज हो गए।

सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोग बातचीत के लिए तैयार नहीं था और उनका अनुभव “शर्मनाक” रहा। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर संविधान क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।

तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल में सागरिका घोष और मेनका गुरुस्वामी भी शामिल थीं। पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया में करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, जिसके चलते वे मतदान अधिकार बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा लिखे गए कई पत्रों का आयोग ने जवाब नहीं दिया। साथ ही, चुनाव प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों के भाजपा से संबंध होने का भी आरोप लगाया गया।

वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक के दौरान सांसदों का रवैया आक्रामक था, जिसके चलते उन्हें शांत रहने के लिए कहा गया। आयोग का कहना है कि बातचीत सामान्य तरीके से हुई, लेकिन बाहर आकर अलग तस्वीर पेश की गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव और भी तेज हो गया है।

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