दिल्ली में महंगी हो सकती है बिजली : 30 हजार करोड़ बकाया पर APTEL के फैसले से बढ़े टैरिफ के संकेत
Munesh Kumar Shukla Mon, Apr 20, 2026
दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में राहत की बजाय आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। अपीलीय बिजली ट्रिब्यूनल (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें करीब 30,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। इस फैसले के बाद अब राजधानी में बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।
यह पूरा मामला बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लंबे समय से लंबित बकाया से जुड़ा है। ये बकाया “रेगुलेटरी एसेट्स” के रूप में जमा होते गए, क्योंकि बीते वर्षों में बिजली दरें कम रखी गईं, जबकि लागत लगातार बढ़ती रही।
DERC ने ट्रिब्यूनल से दलील दी थी कि यदि भुगतान की समयसीमा बढ़ा दी जाए, तो उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ नहीं पड़ेगा और दरों में तेज बढ़ोतरी से बचा जा सकेगा। हालांकि, APTEL ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और पहले से तय भुगतान समयसीमा को लागू रखने का निर्देश दिया।
दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें सभी राज्यों को निर्देश दिया गया था कि वे अप्रैल 2024 से लेकर 2028 तक बिजली क्षेत्र के पुराने बकायों का निपटान करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर टैरिफ बढ़ाने की अनुमति भी दी गई थी।
दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों से अलग है, क्योंकि यहां बिजली वितरण कंपनियां निजी हैं। ऐसे में सरकार के लिए पूरे बोझ को खुद उठाना आसान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बकाया वसूली या तो बिजली दरों में बढ़ोतरी, सरकारी सब्सिडी, या दोनों के मिश्रण से की जा सकती है।
कुल मिलाकर, जब तक कोई वैकल्पिक वित्तीय समाधान नहीं निकलता, दिल्ली के घरों और व्यवसायों को आने वाले समय में बढ़े हुए बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है।
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