यूपी : यूपी में चाइनीज मांझे से हुई मौत अब हादसा नहीं, हत्या मानी जाएगी
Munesh Kumar Shukla Thu, Feb 5, 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझे से युवक की मौत के बाद अब सरकार का रुख सख्त हो गया है। यूपी में पहले ही चाइनीज मांझे के प्रयोग पर रोक लगाई गई है। हालांकि, लगातार इसका उपयोग होता रहा है। ताजा वारदात के बाद सीएम ने इस पर सख्त नाराजगी जातई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सीएम ने इस पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है और पुलिस को पूरे राज्य में छापेमारी करके इसकी अवैध बिक्री को रोकने का निर्देश दिया है। उन्होंने चाइनीज मांझे के खिलाफ पूरे राज्य में अभियान चलाने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि चाइनीज मांझे से होने वाली किसी भी मौत को हत्या माना जाएगा और पूरे आपरेशन की समीक्षा उच्चतम स्तर पर की जाएगी। लखनऊ के बुलाकी अड्डा स्थित हैदरगंज पुल के पास बुधवार की शाम बाइक से जा रहे 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब की गर्दन में मांझा फंस गया था। शोएब कुछ समझ पाते इसके पहले ही मांझे से उनकी गर्दन की नसें कट गई। किसी तरह उन्होंने बाइक रोकी और अचेत होकर सड़क पर गिर गए। राहगीरों की मदद से उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस हादसे का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया है। चाइनीज मांझे की बिक्री पर कोर्ट और एनजीटी ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद चोरी-छिपे यह बिक रहा है। प्रतिबंध के बावजूद मांझा की बिक्री पुलिस एवं प्रशासन पर सवाल खड़े कर रही है। चाइनीज मांझा खरीदने और बेचने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, सकता है। बीएनएस की धारा 1986 की धारा 15 के तहत पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। बीएनएस की धारा 188 के तहत छह महीने तक की सजा या जुमार्ना हो सकता है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत 50,000 रुपए तक का जुर्माना और पाच साल की सजा का प्रावधान है। मध्य प्रदेश में भी चाइनीज मांझा लोगों की जान ले रहा है, लेकिन सरकारी तंत्र का हाल ऐसा है कि चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए दिए गए आदेश-निर्देश हवा में हैं। ठोस कार्रवाई नहीं होने का ही परिणाम है कि हर साल मकर संक्रांति के समय कई लोगों की गर्दन कट जा रही है। घटना होने के बाद पुलिस जागती है, फिर आदेश जारी होते हैं। कार्रवाई का दिखावा होता है। इसके बाद चुप्पी हो जाती है। फरवरी 2024 में पर्यावरण विभाग की तरफ से प्रतिबंध की राजपत्र में अधिसूचना भी प्रकाशित की गई। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश जारी किए। उसके बाद भी यह सभी आदेश-निर्देश हवा में ही रहे। जानलेवा मांझे के निर्माण से लेकर उपयोग तक में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों का दायित्व भी निर्धारित है, पर सच्चाई यह है कि पुलिस को छोड़ बाकी विभाग सुस्त पड़े हैं। वन विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारियों को जैसे कुछ पता ही नहीं है कि शासन ने उन्हें भी जिम्मेदारी दी है।
विज्ञापन