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: सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 'असंवैधानिक' करार देते हुए रद्द किया।

admin Fri, Feb 16, 2024

सुप्रीम कोर्ट 

इलेक्टोरल बॉन्ड इसलिए लाए गए थे, ताकि राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग जुटाने के तरीके में पारदर्शिता लाई जा सके।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 'असंवैधानिक' करार देते हुए रद्द कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को गोपनीय रखना संविधान के अनुच्छेद 19(1) और सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली इस बेंच में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र शामिल थे।

बेंच ने कहा, लोगों को ये जानने का अधिकार है कि राजनीतिक पार्टियों का पैसा कहां से आता है और कहां जाता है।

इलेक्टोरल बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वालों में एक एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) भी शामिल थी।

एडीआर का दावा है कि मार्च 2018 से जनवरी 2024 के बीच राजनीतिक पार्टियों को चुनावी बॉन्ड के जरिए 16,492 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है।

चुनाव आयोग में दाखिल 2022-23 के लिए ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को 1,294 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिला।

जबकि, उसकी कुल कमाई 2,360 करोड़ रुपये रही। यानी, बीजेपी की कुल कमाई में 40 फीसदी हिस्सा इलेक्टोरल बॉन्ड का रहा।

सबसे ज्यादा चुनावी बॉन्ड बीजेपी को

इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक ये भी थी कि इससे सबसे ज्यादा फायदा सत्ताधारी पार्टी को होता है। और वो इसका अनुचित फायदा उठाती हैं।

आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 से 2021-22 के बीच बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 5,271 करोड़ रुपये का चंदा मिला।

सबसे ज्यादा चंदा उसे 2019-20 में मिला था। वो चुनावी साल था और तब बीजेपी को 2,555 करोड़ रुपये का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड से आया था।

विधानसभा चुनाव के वक्त भी पार्टियों की फंडिंग बढ़ जाती है। इसे ऐसे समझिए कि पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव हुए थे, उस साल सत्ताधारी पार्टी टीएमसी को 528 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग इलेक्टोरल बॉन्ड से आई थी।