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: सभी स्कूलों में वैदिक शिक्षा जरूरी - रविन्द्र पुरी जी।

admin Thu, Nov 23, 2023

बीघापुर उन्नाव एम जी कालेज आफ साइंस आर्ट एंड कल्चर गुरूवार काे भगवा रंग में रंगा था। हर ओर वैदिक मंत्रोच्चारण हो रहा था। सनातन संस्कृति का गवाह बनने के लिए हजारों लाेग अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। माैका था बारहवें विश्व वैदिक सम्मेलन व सामूहिक उपनयन संस्कार का।
यहां 84 बटुकाें का उपनयन संस्कार किया गया। बैसवारा ब्राम्हण उत्थान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय के नेतृत्व में भव्य आयाेजन हुआ।
इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा परिषद,महानिर्वाणी के सचिव महंत स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज ने उपनयन संस्कार में दीक्षित 84 बटुकों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मनुष्य धन,वैभव से नहीं, ज्ञान,विचार,गुण और संस्कार से बड़ा होता है। उपनयन संस्कार के बिना जीवन निष्फल होता है। संस्कारों की प्रथम प्रक्रिया मां से शुरू होती है और फिर गुरु से।
मां से संस्कारों की जो प्रक्रिया आरम्भ होती है,गुरु उसे परिष्कृत करता है।इसके बाद वह समाज जीवन में आता है । यूं तो भारतीय संस्कृति में 16 संस्कार हैं।
लेकिन अग्नि संस्कार, जल संस्कार व वायु संस्कार प्रमुख है। उन्होने कहा कि समाज में ब्राम्हण अर्थात गुरू नही रहेगा ताे समाज भ्रमित हो जायेगा। जब जब साधु व ब्राम्हण में फूट पडती है समाज नष्ट होता है।
उन्होने कहा कि भारतीय ऋषियों, मनीषियों की परंपरा गुरूओं की बदाैलत ही बची है।
शिशु वेद काे पांचवा वेद बताते हुये उन्होने कहा कि गुरू परंपरा से मिली शक्तियों और गुप्त क्रियाओं से ही वेद, पुराण और गीता के अठारह अध्याय सुरक्षित है।
इन्हे सुरक्षित रखने में ब्राम्हणाें का बडा याेगदान है। सनातन के अलावा दूसरा काेई धर्म नही है।
उन्होने कहा कि सभी सरकारी व निजी स्कूलों में वैदिक गुरू की नियुक्ति की जानी चाहिए। हम लाेग इसका प्रयास कर रहे हैं।
उन्होने कहा कि आज कि राजनीति में अगर याेग्य ब्राम्हण और साधु आयेंगे ताे समाज का कल्याण होगा। ब्राह्मण धर्म का अधिष्ठाता है और स्त्री धर्म की प्रतिमूर्ति है।
ब्रम्ह विद्या न बदली है न बदलेगी। माेह का क्षय ही माेक्ष है। उन्होने कहा कि ब्राम्हणाें के अंदर ब्राम्हणत्व हाेना चाहिए।
इस अवसर पर स्वामी ब्रम्हात्मानंद सरस्वती ने कहा कि ब्राम्हण समाज का मुख है। वह समाज काे दिशा देने का काम करता है।
वेदों और उपनिषदाें के माध्यम से उन्होने भारतीय धर्म व्यवस्था पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर गाेविंद नारायण शुक्ल, ललित शुक्ला, शैलेन्द्र शुक्ला, सुधीर बाजपेई, दिलीप बाजपेई, आंशू बाजपेई, महेन्द्र, अंकित परिहार, शानू अवस्थी, अभय सिंह, मनाेज पांडेय, अंकित पाण्डेय, कमलाकांत शुक्ला, जागेश्वर अवस्थी, गुड्डू तिवारी, अश्वनी बाजपेयी, मुनेश शुक्ला, संताेष पांडेय, रज्जन सिंह समेत हजारों की संख्या में लाेग माैजूद रहे।
इस अवसर पर बैसवारा ब्राम्हण उत्थान समिति के अध्यक्ष अशाेक पांडेय ने स्वामी रविन्द्र पुरी व अन्य आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त कर उपनयन संस्कार कराने वाले बटुकाें के उज्जवल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज ने वरिष्ठ पत्रकार सियाराम पाण्डेय शांत की पुस्तक मणिपुर की आग का विमोचन किया।

इन विभूतियों का हुआ सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर नवीन आनंद जाेशी, चंदन मिश्र, नितिन चाैबे, प्रभात शुक्ल, मनोज व्दिवेदी काे ब्राम्हण गाैरव तथा गिरिधर शर्मा और शाहनवाज हसन काे पत्रकार गाैरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बैसवारा ब्राम्हण उत्थान समिति के अध्यक्ष अशाेक पांडेय ने स्वामी रविन्द्र पुरी आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त कर उपनयन संस्कार कराने वाले बटुकाें के उज्जवल भविष्य की कामना की।