Advertisment

26 जनवरी 2026 से e paper tv भारतवर्ष पढ़े हर रोज

14th August 2026

BREAKING NEWS

TV Bharatvarsh E Paper 15-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 14-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 13-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 12-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 11-08-2026

उन्नाव : जीवित होते हुए भी ‘मृत’ घोषित,दो बुजुर्ग एक साल से पेंशन बहाली को भटकने को मजबूर

Munesh Kumar Shukla Mon, Feb 23, 2026

उन्नाव जिले के बिछिया ब्लॉक के मुर्तजानगर गांव से प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां के निवासी छोटे लाल पुत्र सूरज बली और गंगा चरण पुत्र मिश्री लाल की वृद्धावस्था पेंशन सरकारी अभिलेखों में त्रुटि के कारण रोक दी गई है। हैरानी की बात यह है कि दोनों बुजुर्गों को रिकॉर्ड में मृत दर्शा दिया गया, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं और पिछले लगभग एक वर्ष से अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।दोनों पीड़ितों के अनुसार, वे लंबे समय से नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे थे। यह पेंशन ही उनके जीवन-यापन का मुख्य सहारा थी। कुछ महीने पहले अचानक उनके खातों में पेंशन आना बंद हो गया। जब उन्होंने संबंधित विभाग में जाकर जानकारी की, तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। यह सुनकर वे स्तब्ध रह गए।छोटे लाल और गंगा चरण ने बताया कि उन्होंने कई बार ब्लॉक और तहसील कार्यालय पहुंचकर अपनी जीवित होने की पुष्टि की। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य पहचान पत्र भी प्रस्तुत किए, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर लौटा दिया गया। लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने और आवेदन देने के बावजूद अब तक पेंशन बहाल नहीं की गई है।पेंशन बंद होने से दोनों बुजुर्गों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वृद्धावस्था में उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है। दैनिक खर्च, दवाइयों और आवश्यक जरूरतों की पूर्ति करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। कई बार उन्हें पड़ोसियों और रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा है। इस स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से भी गहरे तनाव में डाल दिया है।ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल दो लोगों का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न है। यदि समय पर रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती, तो बुजुर्गों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।वहीं, संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और उचित समाधान का आश्वासन दिया है। अब क्षेत्र के लोग यह उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद न केवल दोनों बुजुर्गों की पेंशन जल्द बहाल होगी, बल्कि जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक बिना बाधा पहुंच सके। इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और आधार आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने के बावजूद यदि इस प्रकार की त्रुटियां सामने आ रही हैं, तो यह सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि वृद्ध और अशिक्षित लोगों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना बेहद कठिन होता है। ऐसे मामलों में प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित सुधार की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी पेंशनधारकों के रिकॉर्ड की पुनः जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पात्र व्यक्ति को कागजी गलती के कारण अपने अधिकार से वंचित न होना पड़े।