Advertisment

26 जनवरी 2026 से e paper tv भारतवर्ष पढ़े हर रोज

21st October 2026

BREAKING NEWS

TV Bharatvarsh E Paper 01-09-2026

TV Bharatvarsh E Paper 27-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 26-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 25-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 23-08-2026

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक बोले- यह लोकतंत्र की जीत : अब जवाबदेही से सुधार की ओर बढ़ने का समय

Munesh Kumar Shukla Sat, Jul 25, 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल जवाबदेही तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अब देश को शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने यह फैसला छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रही राष्ट्र-विरोधी ताकतों को रोकने के उद्देश्य से लिया है। उनका इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले आया। सीजेपी पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा किसी समझौते का हिस्सा नहीं, बल्कि स्वतंत्र निर्णय होना चाहिए।

इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों ने खुशी जताई। सोनम वांगचुक, जो प्रदर्शनकारियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे, ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों की है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए वांगचुक ने लिखा कि यह "शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत" है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी और देश की Gen Z पीढ़ी की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं ने संयम और साहस के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने उन नागरिकों का भी आभार जताया, जिन्होंने भय से ऊपर उठकर जवाबदेही की मांग का समर्थन किया।

वांगचुक ने अपने संदेश के अंत में "जवाबदेही से अब सुधार की ओर" का आह्वान किया। उनका कहना था कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे संरचनात्मक बदलाव सुनिश्चित करना होना चाहिए, जिससे भविष्य में परीक्षा संबंधी विवाद और अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।