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ममता बनर्जी : सुप्रीम कोर्ट में पहली बार किसी CM ने बहस की, जज भी ध्यान से सुनते रहे

Munesh Kumar Shukla Wed, Feb 4, 2026

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत में एक अलग ही रूप में उपस्थित हुईं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने ममता बनर्जी से कहा, "आपने बहुत अच्छा वकील चुना है, आप उन्हें बहस करने दें।" इस पर ममता बनर्जी ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया, "सेव डैमोक्रेसी।" यह पल दर्शाता है कि ममता न केवल एक राजनेता के रूप में, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और न्याय की आवश्यकता के प्रतीक के रूप में सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित थीं।सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह घटना अनूठी थी क्योंकि किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने स्वयं अदालत में बैठकर बहस की। ममता बनर्जी ने वकीलों के साथ बैठकर बंगाल के SIR (Special Identification Registration) मुद्दे पर दलीलें दीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और संबंधित अधिकारियों ने उनके सवालों का कोई जवाब देने को तैयार नहीं हैं। इससे पहले भी कुछ मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे, लेकिन उन्होंने बहस नहीं की थी। ममता बनर्जी के मामले में यह पहली बार था कि किसी मुख्यमंत्री ने सीधे बहस में भाग लिया।सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी वकीलों की कतार में सबसे आगे बैठी हुई नजर आईं। उन्होंने कहा, "मैं भी इसी राज्य से हूं, इसलिए मैं इसे विस्तार से समझा सकती हूं।" उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि न्याय मिलने में विलंब के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। उन्होंने अदालत को बताया कि वे सामान्य परिवार से आती हैं, लेकिन अपनी पार्टी और राज्य के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं। उनके इस आत्मीय और संवेदनशील भाषण ने अदालत के वातावरण को भी प्रभावित किया।मुख्य न्यायाधीश ने ममता बनर्जी को आश्वासन देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार भी इस मामले में पक्षकार है और केस लड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ देश के वरिष्ठ वकील मौजूद हैं, जैसे कपिल सिब्बल और गोपाल, जो बहस कर रहे हैं। इस पर ममता ने कहा कि जब वकील शुरू से लड़ रहे हैं, रिकॉर्ड पर बार-बार दलीलें दी जा रही हैं, छह बार चुनाव आयोग को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला, तो यह स्वाभाविक है कि न्याय मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय के रास्ते पर अड़चनें महसूस हो रही हैं।ममता ने न्यायालय से आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें पांच मिनट बोलने की अनुमति दी जाए। CJI ने तुरंत जवाब दिया कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे 15 मिनट देंगे, लेकिन पहले अदालत की ओर से कुछ बातों को समझना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर समस्या का समाधान संभव है और इस मामले का भी हल निकाला जाएगा। उन्होंने ममता को यह भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार और उनकी पार्टी की ओर से उठाई गई सभी समस्याएं रिकॉर्ड पर हैं और उन्हें स्वीकार किया गया है।ममता ने अदालत को यह भी बताया कि वे कुछ दस्तावेज और तस्वीरें प्रस्तुत करना चाहती हैं, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल के सभी प्रमुख अखबारों में इन मुद्दों को प्रकाशित किया गया है और वे चाहती हैं कि इन समस्याओं का त्वरित समाधान निकले। ममता ने जोर देकर कहा कि वे अपने दायित्व से पीछे नहीं हटेंगी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी कोशिश करेंगी।उन्होंने विशेष रूप से भाषा और नामों की वर्तनी में अंतर के कारण मतदाता सूची से लोगों को बाहर किए जाने की समस्या को उठाया। ममता ने कहा कि कुछ बेटियां शादी के बाद ससुराल चली गई हैं, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने आदेशों का पालन नहीं कर रहा है और इस कारण कई BLO (Booth Level Officers) की मृत्यु भी हो चुकी है। ममता ने इस मुद्दे को बंगाल के खिलाफ अन्यायपूर्ण लक्ष्यकरण के रूप में प्रस्तुत किया और सवाल उठाया कि यह कार्रवाई केवल बंगाल पर क्यों हो रही है, जबकि अन्य राज्यों जैसे असम में ऐसा नहीं किया जा रहा।इस पूरे घटनाक्रम में ममता ने न्यायालय को यह स्पष्ट संदेश दिया कि उनके द्वारा उठाया गया मुद्दा वास्तविक और गंभीर है।