कानपुर : कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का बड़ा खुलासा, एसआईटी ने जांच तेज की
Munesh Kumar Shukla Thu, Feb 26, 2026
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से हाल ही में फर्जी डिग्री से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने किदवई नगर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसका नेटवर्क प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था।एसआईटी की प्रारंभिक जांच में 103 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। बुधवार को फरीदाबाद और हापुड़ की दो विश्वविद्यालयों ने संबंधित डिग्रियां अपने यहां से जारी होने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद एसआईटी ने अन्य विश्वविद्यालयों से जारी डिग्रियों की जांच और तेज कर दी है। जांच के लिए टीमें अलीगढ़, फिरोजाबाद और सहारनपुर भेजी गई हैं, जो अभी लौटकर नहीं आई हैं।किदवई नगर पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी वर्ष 2012 से फर्जी डिग्रियों का कारोबार चला रहे थे। इनके पास से 9 राज्यों की 15 विश्वविद्यालयों से संबंधित 900 से अधिक डिग्रियां, माइग्रेशन प्रमाणपत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
बरामद दस्तावेजों में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की 357 डिग्रियां भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा है, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों में छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे शामिल हैं। इनकी तलाश एसआईटी और सर्विलांस टीम द्वारा की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य विश्वविद्यालयों और संभावित ग्राहकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद और खुलासे होने की संभावना है।
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