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25th June 2026

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पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं! : विदेश मंत्रालय के बयान से छिड़ी नई बहस

Munesh Kumar Shukla Thu, Jun 25, 2026

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा पासपोर्ट को लेकर दिए गए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण के बाद देशभर में नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। 14वें 'पासपोर्ट सेवा दिवस' के अवसर पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण। मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई कि आखिर भारतीय नागरिकता का सबसे पक्का प्रमाण क्या है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा प्रदान करना है। हालांकि, पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह नागरिकता साबित करने वाला अंतिम कानूनी दस्तावेज है। मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण ने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की वैधता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस वर्ष की शुरुआत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। अदालत ने कहा था कि आधार केवल पहचान और निवास से संबंधित दस्तावेज है। इसी प्रकार, वोटर आईडी कार्ड को भी नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता। यह मुख्य रूप से पहचान और मतदान के अधिकार से जुड़ा दस्तावेज है।

भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार, 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है। वहीं, 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्तियों के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे व्यक्तियों के मामले में दोनों माता-पिता के भारतीय होने अथवा एक अभिभावक के भारतीय नागरिक तथा दूसरे के अवैध प्रवासी न होने की शर्त लागू होती है।

इस अवसर पर विदेश मंत्रालय ने देशभर में पासपोर्ट सेवा नेटवर्क के विस्तार, डिजिटल सेवाओं के विकास और चिप-आधारित ई-पासपोर्ट की सफल शुरुआत को भी अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया।

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