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कानपुर : लेदर सेक्टर को नई रफ्तार: IGCR स्कीम से बंद इकाइयों में जगी फिर से उम्मीद

Munesh Kumar Shukla Sun, Feb 1, 2026

कानपुर केंद्रीय बजट ने कानपुर की लेदर इकाइयों को आईजीसीआर स्कीम में शामिल कर और समयसीमा बढ़ाकर बड़ी व्यापारिक राहत प्रदान की है। शू अपर एक्सपोर्टर्स को मिली नई छूट से 222 मिलियन डॉलर के मौजूदा निर्यात कारोबार को वैश्विक स्तर पर बड़ी छलांग लगाने का मौका मिलेगा। कानपुर में केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर आम आदमी से लेकर कारोबारी और उद्योग जगत की नजरें टिकी हुई थीं। बजट को कुल मिलाकर विकास को गति देने वाला माना जा रहा है। खास तौर पर लेदर (चर्म) इंडस्ट्री के लिए किए गए प्रावधानों से कानपुर और आसपास की दम तोड़ती उद्योग इकाइयों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। कानपुर और उसके आसपास करीब एक हजार छोटी-बड़ी लेदर इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से कई पर बंदी का संकट बना हुआ था। हालांकि, हाल के महीनों में यूरोपीय देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों और अब बजट में घोषित राहतों से उद्योग के दोबारा पटरी पर लौटने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। उद्योग जगत ने बजट में आईजीसीआर स्कीम के विस्तार का स्वागत किया है। कस्टम नोटिफिकेशन नंबर 2/2026 के तहत शू अपर एक्सपोर्टर्स को इस योजना में शामिल किया गया है। पहले यह सुविधा लेदर गारमेंट्स, फुटवियर और लेदर प्रोडक्ट्स तक सीमित थी। उद्यमियों का मानना है कि इससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वर्ष 2024-25 में शू अपर का निर्यात 222 मिलियन डॉलर रहा था। इसके साथ ही आईजीसीआर के तहत निर्यात की समयसीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष किए जाने और योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने को भी राहत भरा कदम बताया गया है। टैग, लेबल, स्टिकर और बेल्ट जैसे आयातित सामान पर कस्टम ड्यूटी छूट बढ़ाए जाने से भी उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जावेद इकबाल, पूर्व रीजनल चेयरमैन, चर्म निर्यात परिषद ने कहा कि बजट में आईजीसीआर स्कीम का विस्तार और यूरोपीय बाजारों में मिली राहत से कानपुर के पारंपरिक लेदर उद्योग को नई दिशा मिलेगी। इससे निर्यात और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।