लखनऊ यूनिवर्सिटी : लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
Munesh Kumar Shukla Fri, Feb 13, 2026
लखनऊ विश्वविद्यालय पर UGC के समर्थन में शुक्रवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार हंगामा किया। छात्रों की कोशिश ‘समता संवर्धन मार्च’ निकालने की थी। पुलिस बल ने उन्हें रोकने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी। प्रदर्शन शुरू होता कि उससे पहले पुलिस ने सभी छात्रों को घेर लिया। इस दौरान छात्र जमीन पर बैठ गए। पुलिस ने घसीट-घसीटकर गाड़ी में डाल दिया। इस दौरान एक छात्र ऐसा भी था जिसे पुलिस गाड़ी के अंदर डाल रही थी लेकिन वह चिल्ला रहा था- ‘मैं धरने में नहीं हूं। मैं धरना नहीं कर रहा हूं।’ कुछ देर बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। वह गाड़ी से किसी तरह उतरकर दूर जाकर खड़ा हो गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई। लखनऊ विश्वविद्यालय से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे छात्र और पुलिसकर्मियों में लगातार नोकझोंक हुई। पुलिस ने छात्रों को प्रदर्शन से रोका। उन्हें गेट से बाहर निकलने नहीं दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्र जमीन पर ही बैठ गए। छात्रों की संख्या अधिक होने के चलते RRF ने भी मोर्चा संभाला। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि जब तक UGC लागू नहीं करवा लेंगे, पीछे नहीं हटने वाले। लखनऊ यूनिवर्सिटी में UGC के समर्थन के प्रदर्शन में समाजवादी छात्र सभा, आईसा, एनएसयूआई, एससीएस, बीएएसएफ, एसएफआई, बाप्सा, युवा और अंबेडकरवादी विद्यार्थी संघ समेत लगभग एक दर्जन छात्र संगठन शामिल हुए। छात्र राणा सुधांशु ने कहा- हम लोगों का प्रदर्शन UGC के उन नए नियमों के समर्थन में है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। मेरा कहना है कि नए नियमों से इतना डरना क्यों? जब आप एससी-एसटी और ओबीसी छात्रों से भेदभाव नहीं करते हो तो डरते क्यों हो? उनको अपने साथ बैठाते हो, किसी तरह से अपमानित नहीं करते तो फिर UGC के नए नियमों से डर क्यों रहे हो? यह नियम हमें समानता से रहने का मौका देगा। प्रदर्शन में शामिल तेजपाल ने कहा कि UGC इसलिए जरूरी है क्योंकि 2018 से 21 तक में एससी-एसटी और ओबीसी के 98 छात्रों की मौत हुई। रोहित वेमुला जैसे छात्रों की मौत इस बात का उदाहरण है कि यूनिवर्सिटी में कितना भेदभाव है। एम्स के पड़ोस में एक मेडिकल कॉलेज है जहां पर जातिगत आधार पर 30 से अधिक छात्रों के नंबर काटकर फेल कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कमेटी बनी और आगे छात्रों के हित में फैसला हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2013 के यूजीसी बिल से काम नहीं चल पा रहा है इसलिए नया कानून लाया जा रहा है। आज उसी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे कर दिया।
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