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पश्चिम बंगाल में कुर्बानी पर सियासी संग्राम! : हुमायूं कबीर बोले- १४०० साल पुरानी परंपरा नहीं रुकेगी

Munesh Kumar Shukla Fri, May 22, 2026

पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर नया राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार द्वारा जारी हालिया नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुस्लिम समुदाय किसी भी स्थिति में कुर्बानी की धार्मिक परंपरा को नहीं रोकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, १९५० के तहत सरकार ने कुछ नियामक निर्देश जारी किए हैं।

हुमायूं कबीर ने कहा कि सरकार गोमांस के सेवन को लेकर नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि कुर्बानी १४०० साल पुरानी धार्मिक परंपरा है और इसे किसी भी दबाव में बंद नहीं किया जा सकता। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है।

कई हिंदू संगठनों और विपक्षी दलों ने कबीर के बयान पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कानून और सामाजिक संवेदनशीलता का पालन सभी समुदायों को करना चाहिए। दूसरी तरफ मुस्लिम संगठनों ने हुमायूं कबीर के समर्थन में कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और किसी समुदाय की धार्मिक परंपरा को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे बयान चुनावी माहौल में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग अपने-अपने पक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा, ताकि किसी भी प्रकार का तनाव पैदा न हो।