तमिलनाडु में फिर राष्ट्रगान विवाद! : शपथ समारोह में गीतों के क्रम पर छिड़ा सियासी संग्राम
Munesh Kumar Shukla Fri, May 22, 2026
तमिलनाडु में एक बार फिर भाषा, संस्कृति और परंपरा को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। गुरुवार को लोक भवन में आयोजित नवनियुक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजकीय गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ को बजाने के क्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। समारोह में वंदे मातरम और राष्ट्रगान के बाद तमिल मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किए जाने पर कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई और इसे राज्य की परंपराओं के खिलाफ बताया।
द्रविड़ राजनीति से जुड़े दलों का कहना है कि तमिलनाडु में लंबे समय से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाझथु’ से होती रही है। यही राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में शपथ समारोह में इसके क्रम में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह केवल एक गीत का मामला नहीं, बल्कि तमिल अस्मिता और राज्य की परंपराओं से जुड़ा मुद्दा है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विचारधारा को राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं पर थोपा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ कुछ नेताओं ने कहा कि राष्ट्रगान और वंदे मातरम का सम्मान सर्वोपरि है और इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। समारोह के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगा, जहां लोग अपने-अपने पक्ष में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में भाषा और सांस्कृतिक पहचान हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। ऐसे मामलों का असर केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राज्य की राजनीति को भी प्रभावित करता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।
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