राहुल गांधी : केंद्र पर जोरदार हमला: श्रम संहिताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर उठाए सवाल
Munesh Kumar Shukla Thu, Feb 12, 2026
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नई श्रम संहिताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के कारण देश के मजदूरों और किसानों का भविष्य अंधकार में है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या वे जनता की आवाज़ सुनेंगे या उनके ऊपर किसी बाहरी “ग्रिप” का प्रभाव इतना मजबूत है कि आम लोगों की चिंताओं को अनसुना किया जा रहा है।राहुल गांधी ने विशेष रूप से चार श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि मजदूरों और किसानों के भविष्य को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अब मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या उन पर किसी “ग्रिप” की पकड़ बहुत मजबूत है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ‘‘आज देश भर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।’’ उनके अनुसार, किसानों को आशंका है कि अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौते उनकी आजीविका पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज़ को पूरी तरह नज़रअंदाज किया गया।’’ उन्होंने पुनः सवाल किया कि क्या मोदी जी अब मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या उन पर किसी “ग्रिप” की पकड़ बहुत मजबूत है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, ‘‘मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं।’’केंद्र सरकार ने कुल 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं तैयार की हैं। ये हैं:वेतन संहिता – मजदूरों के वेतन और भत्तों से जुड़े नियम।औद्योगिक संबंध संहिता – संगठन और यूनियनों के बीच संबंधों का निर्धारण। सामाजिक सुरक्षा संहिता – बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से संबंधित।व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता – कार्यस्थल की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का निर्धारण। सरकार का कहना है कि ये सुधार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ाएंगे और निवेश को आकर्षित करेंगे। हालांकि, विपक्ष और कई ट्रेड यूनियन इसे मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने और पूंजीपतियों के पक्ष में कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि इन संहिताओं से मजदूर वर्ग और किसान समुदाय की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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