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अवैध खनन : तहसील बीघापुर में 'खाकी और खादी' के संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध खनन का काला कारोबार।

Munesh Kumar Shukla Mon, Mar 2, 2026

बीघापुर, उन्नाव

तहसील क्षेत्र के अंतर्गत अवैध मिट्टी खनन अब केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट बन चुका है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन की 'मूक सहमति' के चलते रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

संरक्षण के घेरे में माफिया:

क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि बीघापुर तहसील क्षेत्र एवं सर्किल क्षेत्र के अंतर्गत और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों को इस अवैध धंधे की पूरी जानकारी है। कई बार सूचना देने के बावजूद, कार्रवाई के नाम पर केवल 'खानापूर्ति' की जाती है। छापेमारी से पहले ही माफियाओं को अधिकारियों की लोकेशन मिल जाती है, जिससे प्रशासन और खनन माफियाओं के बीच की सांठगांठ साफ उजागर होती है।

मुख्य बिंदु जो उठाते हैं सवाल:

नियमों की अनदेखी: खनन के लिए निर्धारित गहराई की सीमा को पार कर खेतों को तालाब में तब्दील किया जा रहा है।

ओवरलोडिंग का कहर: रात भर दौड़ते डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉली से न केवल सड़कें बदहाल हो रही हैं, बल्कि आए दिन हादसे की आशंका बनी रहती है।

शिकायत का असर शून्य: स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी डायल 112 या स्थानीय थाने को फोन किया जाता है, तो पुलिस या तो देर से पहुँचती है या खनन स्थल के बजाय दूसरी ओर चली जाती है।

राजस्व का नुकसान: बिना किसी परमिट या रॉयल्टी के हो रहे इस खनन से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

खतरे में ग्रामीण और पर्यावरण:

अवैध खनन के चलते तहसील बीघापुर क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी तो नष्ट हो ही रही है, साथ ही भारी वाहनों के दबाव से ग्रामीण अंचलों की नई बनी सड़कें भी जगह-जगह से धंस गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के वरदहस्त के बिना इस स्तर पर खुलेआम लूट संभव नहीं है।

अब उच्चाधिकारियों से उम्मीद:

अब देखना यह है कि उन्नाव के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस गंभीर भ्रष्टाचार का संज्ञान लेते हैं या तहसील बीघापुर सर्किल क्षेत्र में इसी तरह 'अंधेर नगरी' चलती रहेगी।

ग्रामीणों ने अब इस मामले को सीधे लखनऊ (मुख्यमंत्री दरबार) तक ले जाने की चेतावनी दी है।