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: मीडिया के सामने खुद किया खुलासा पंडित धीरेंद्र शास्त्री कथावाचक जया किशोरी के साथ करने वाले हैं शादी?

admin Wed, Jan 25, 2023

  मीडिया के सामने खुद किया खुलासा पंडित धीरेंद्र शास्त्री कथावाचक जया किशोरी के साथ करने वाले हैं शादी?    रायपुर: Dhirendra Shastri jaya Kisori ke sath karenge shadi? बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का प्रवचन का आज आखिरी दिन था। 7 दिनों तक चले प्रवचन के दौरान उन्होंने अपने दिव्य दरबार से कई लोगों की समस्याओं का समाधान किया, तो वहीं बिलासपुर में सुल्ताना का उन्होंने घर वापसी कराया।

सुल्ताना का सनातन धर्म में आने के बाद सुभी नामकरण किया गया है। लेकिन इन सब के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग सोशल मीडिया पर ये दावा कर रहे हैं कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री कथावाचक जया किशोरी से शादी करने वाले हैं। जया किशोरी से करेंगे शादी Dhirendra Shastri jaya Kisori ke sath karenge shadi? दरअसल एक न्यूज चैनल से बात करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से उनकी शादी के बारे में पूछा गया। अपनी शादी की बात सुनकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जोर-जोर से हंसने लगते हैं और एंकर को कहते हैं, ”बहन आप हमारी शादी की बारात में आना, बहुत जल्द करेंगे शादी।” क्या कहते हैं धीरें क्यूद्र शास्त्री इस पर एंकर कहती हैं कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी आपके और एक साध्वी (जया किशोरी) के बारे में सोशल मीडिया पर शादी की बात वायरल होते रहती हैं, बहुत सारे मीम्स बनते हैं, क्या यह सच है? पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इसपर कहते हैं, ”ऐसा कुछ भी नहीं है, ये एक मिथ और झूठ है। ये एकदम गलत बात है। हमारा ऐसा कोई भाव नहीं है जब भी करेंगे डंका बजा करके करेंगे।’ बता दें पिछले कई दिनों से धीरेंद्र शास्‍त्री और जया किशोरी की शादी ारत को अंग्रेजी और अंग्रेजियत के मोहपाश से मुक्त होना चाहिए। अंग्रेजी को विश्वभाषा कहा जाता है। लेकिन जापान, रूस, चीन आदि देशों में अंग्रेजी की कोई हैसियत नहीं है। एशिया महाद्वीप के 48 देशों में भारत के अलावा किसी भी देश की मुख्य भाषा अंग्रेजी नहीं है। अजरबैजान की भाषा अजेरी और तुर्की है। इसराइल की हिब्रू। उज्बेकिस्तान की उज्बेक। ईरान की फारसी। सऊदी अरब, सीरिया, इराक, जॉर्डन, यमन, बहरीन, कतर व कुवैत की भाषा अरबी है। चीन व ताइवान की भाषा मंदारिन है। श्रीलंका की सिंहली व तमिल है। अफगानिस्तान की पश्तो। तुर्की की तुर्की है। यूरोप अंग्रेजी भाषी माना जाता है। लेकिन यूरोप के 43 देशों में से 40 की भाषा अंग्रेजी नहीं है। यहां डेनमार्क की डेनिश। चेक गणराज्य की चेक। रूस की रूसी। स्वीडेन की स्वीडिश। जर्मनी की जर्मन। पोलैंड की पोलिश। इटली की इटैलियन। ग्रीस की ग्रीक। यूक्रेन की यूक्रेनी। फ्रांस की फ्रेंच। स्पेन की स्पैनिश। सिर्फ ब्रिटेन की भाषा अंग्रेजी व आयरलैंड की आयरिश व अंग्रेजी है। इसके बावजूद भारत में अंग्रेजी महारानी है। भारत पर अनंतकाल तक शासन करना अंग्रेजों का मंसूबा था। भारतीय संस्कृति, सभ्यता व मौलिक चिंतन साम्राज्यवादी हितों से मेल नहीं खाता था। भारत में अंग्रेजी का विस्तार साम्राज्यवादी हितों से जुड़ा रहा है। अंग्रेजी केवल भाषा ही नहीं है। अंग्रेजी की विशेष संस्कृति है। यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विरोधी है और श्रेष्ठतावादी है। जैसे ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में फूट डालकर अपना स्वार्थ साधा वैसे ही अंग्रेजियत ने भारतीय भाषाओं में भेद किया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम की भाषा मातृभाषा हिंदी व अन्य क्षेत्रीय भाषाएं थीं। कांग्रेस अपने जन्मकाल से ही अंग्रेजी को वरीयता दे रही थी। गांधी जी ने कहा था, ‘‘अंग्रेजी ने हिंदुस्तानी राजनीतिज्ञों के मन में घर कर लिया है। मैं इसे अपने देश और मनुष्यत्व के प्रति अपराध मानता हूँ।‘‘ (सम्पूर्ण गांधी वांग्मय 29/312) कांग्रेसी शासन ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से ही कराई। हिंदी व क्षेत्रीय भाषा के छात्रों के साथ अन्याय किया। जनता पार्टी की पहली गैर कांग्रेसी सरकार ने हिंदी व क्षेत्रीय भाषा भाषी छात्रों के साथ न्याय किया। 1979 से हिंदी व क्षेत्रीय भाषा भाषी छात्र भी अपनी भाषा में परीक्षा दे रहे हैं। संस्कृति, सेवायोजन व संवाद की भाषाएं भारतीय हैं। बावजूद इसके अंग्रेजी प्रभुवर्ग की भाषा बनी। मातृभाषा के उपयोग के अभाव में संस्कृति निष्प्राण होती है। अंग्रेजी को विश्वभाषा बताने वाले आत्महीन ग्रंथि के शिकार हैं। गांधी ने लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय एक भाषा एक लिपि सम्मेलन (1916) में कहा, ‘‘मैं टूटी फूटी हिंदी में बोलता हूँ। अंग्रेजी बोलने में मुझे पाप लगता है।‘‘ लेकिन अंग्रेजी बोलने वाले सभ्य थे। हिंदी बोलने वाले असभ्य थे। गांधी ने कहा था, ‘‘मुझ जैसे लोगों को हिंदी व्यवहार के कारण धक्के खाने पड़ते हैं। किसी के सामने झुकने की जरूरत नहीं। वायसराय से भी अपनी भाषा में बात करो।‘‘ संविधान सभा में राजभाषा पर लम्बी बहस हुई थी। अलगू राय शास्त्री ने कहा, ‘‘हिंदी की होड़ है अंग्रेजी के साथ। बांग्ला, तमिल, तेलगु, कन्नड़ से नहीं। अंग्रेजी हुकूमत गई। अंग्रेजी हमारे किसी भी प्रांत की भाषा नहीं है।‘‘ पं० नेहरू ने कहा, ‘‘अंग्रेजी कितनी भी अच्छी हो हम इसे सहन नहीं कर सकते।‘‘ लेकिन अंग्रेजी बनाए रखने के प्रस्ताव पर वे आयंगर से सहमत थे। उन्होंने सभा में कहा था कि हमने अंग्रेजी इस कारण स्वीकार की कि वह विजेता की भाषा थी। राजभाषा प्राविधान के प्रस्तावक एम० जी० आयंगर ने हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव रख