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राम मंदिर दान मामले की जांच में तेजी : ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख लोगों को भेजे जा सकते हैं नोटिस

Munesh Kumar Shukla Tue, Jun 30, 2026

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी के आरोपों की जांच अब तेज होती दिखाई दे रही है। पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जांच के अगले चरण में ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए औपचारिक नोटिस जारी किए जा सकते हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा तथा ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव सहित कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन व्यक्तियों को नोटिस भेजने का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि मामले से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त करना है। जांच दल यह समझने का प्रयास कर रहा है कि दान राशि के संग्रह, रखरखाव और उपयोग की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित की गई और क्या कहीं किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ।

पुलिस का कहना है कि अब तक विभिन्न दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों की जांच की जा रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो वित्तीय विशेषज्ञों और लेखा परीक्षकों की सहायता भी ली जा सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं के आरोपों में कितना तथ्य है और क्या किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान हुआ है।

उधर, ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि सभी वित्तीय लेन-देन निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किए गए हैं। उनका दावा है कि यदि जांच एजेंसियां कोई जानकारी मांगती हैं तो पूरा सहयोग दिया जाएगा। ट्रस्ट का यह भी कहना है कि श्रद्धालुओं के दान का उपयोग मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शी तरीके से किया गया है।

इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा जारी है। विपक्ष पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, जबकि कई धार्मिक संगठनों ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां किन तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करती हैं और क्या इस मामले में किसी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जाते हैं।