राम मंदिर दान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार : नियमित पीठ के समक्ष होगी सुनवाई
Munesh Kumar Shukla Tue, Jun 30, 2026
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोपों से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सोमवार को शीर्ष अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से मामले की तात्कालिक सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई असाधारण आधार नहीं है, जिसके कारण इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवकाश के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया कि किसी भी याचिका की सुनवाई निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी और फिलहाल इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि अदालत पहले नियमित प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों को सुनना चाहती है।
उधर, इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं जारी हैं। विपक्षी दल पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि सभी वित्तीय लेन-देन नियमों के अनुरूप किए गए हैं और यदि किसी भी स्तर पर जांच होती है तो पूरा सहयोग दिया जाएगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई कब होती है और अदालत इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है। यदि अदालत याचिका स्वीकार करती है, तो जांच एजेंसियों की भूमिका और जांच के स्वरूप पर भी महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
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