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पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर : रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी: क्रिसिल रिपोर्ट

Munesh Kumar Shukla Wed, May 27, 2026

वैश्विक स्तर पर बढ़ते पश्चिम एशिया तनाव का असर अब भारत के उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। CRISIL की ताजा क्विकनॉमिक्स रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट की वजह से कच्चे तेल के साथ-साथ तांबा, एल्युमीनियम, प्लास्टिक, गैस और रसायनों जैसी औद्योगिक सामग्रियों की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।

क्रिसिल ने बताया कि अप्रैल 2026 में उसका डब्ल्यूपीआई आधारित इनपुट-आउटपुट अनुपात 44 महीनों में पहली बार 1.0 के पार पहुंच गया। यह संकेत देता है that कंपनियों की इनपुट लागत, उत्पादों की बिक्री कीमतों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इनपुट कीमतों में 6.2 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि तैयार उत्पादों की कीमतों में केवल 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

सरल शब्दों में कहें तो कंपनियां सामान बनाने में पहले से कहीं ज्यादा खर्च कर रही हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। हालांकि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान ने केवल तेल बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक औद्योगिक सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है। विशेष रूप से तांबा और एल्युमीनियम जैसी महत्वपूर्ण धातुओं की बढ़ती कीमतों ने निर्माण क्षेत्र और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।