इजराइल के विपक्षी नेता का बड़ा बयान : नेतन्याहू को दी सख्त सलाह; भारत में छिड़ी नई राजनीतिक बहस
Munesh Kumar Shukla Tue, Jul 28, 2026
इजराइल की राजनीति में एक बार फिर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। हालांकि इस बार विवाद घरेलू राजनीति नहीं, बल्कि अमेरिका की मध्यस्थता में प्रस्तावित इजराइल-सऊदी अरब समझौते को लेकर है। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता यैर लैपिड ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर और अधिक सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
यैर लैपिड ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू को प्रस्तावित समझौते के दौरान इजराइल के सुरक्षा हितों पर कोई समझौता नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि अमेरिका की मध्यस्थता में सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंध सामान्य बनाने की दिशा में समझौता होता है, तो उसमें इजराइल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
लैपिड ने कहा कि यदि समझौते के तहत सऊदी अरब औपचारिक रूप से इजराइल को मान्यता देता है और बदले में अमेरिका उसे सुरक्षा गारंटी तथा नागरिक परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देता है, तो यह स्वीकार्य हो सकता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब को अपने स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
विपक्षी नेता का तर्क है कि भविष्य में यदि यूरेनियम संवर्धन की क्षमता का दुरुपयोग हुआ, तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और इजराइल के लिए नए खतरे पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस मुद्दे पर स्पष्ट और कठोर रुख अपनाना चाहिए तथा किसी भी ऐसी व्यवस्था से बचना चाहिए जो भविष्य में सुरक्षा जोखिम बन सके।
लैपिड के इस बयान ने इजराइल में यह संदेश देने की कोशिश की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों पर विपक्ष सरकार की आलोचना तो करता है, लेकिन साथ ही सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अपनी स्पष्ट नीति भी सामने रखता है। उनके बयान की चर्चा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारत में भी हो रही है, जहां इसे विपक्ष की भूमिका को लेकर अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
विज्ञापन