रांची में छात्र प्रदर्शन के दौरान AISA अध्यक्ष पर स्याही फेंकी : आरोपी हिरासत में; परीक्षा सुधारों की मांग तेज
Munesh Kumar Shukla Sat, Aug 8, 2026
रांची में शुक्रवार को झारखंड विधानसभा की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर कथित तौर पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। यह विरोध प्रदर्शन 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का हिस्सा था।
घटना के बाद नेहा बोरा ने स्याही लगी अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ करीब 20 अन्य महिलाओं पर भी तरल पदार्थ फेंका गया। बोरा ने इस घटना को लेकर कहा कि स्याही उनके लिए शर्मिंदा करने का हथियार हो सकती है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसी स्याही से अपना भविष्य लिखेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस घटना से डरने वाली नहीं हैं।
बोरा ने अपने बयान में इससे पहले हुए छात्र प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों में केवल निजी एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय संबंधित सरकारी अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
AISA अध्यक्ष ने कथित अनियमितताओं से जुड़ी निजी एजेंसियों को हटाने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि उसने नेहा बोरा पर इसलिए स्याही फेंकी क्योंकि वह उमर खालिद का समर्थन करती हैं। आरोपी ने बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों पर राजनीतिक आरोप भी लगाए।
नेहा बोरा परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने 23 दिनों तक भूख हड़ताल भी की थी। रांची की ताजा घटना के बाद परीक्षा सुधार, छात्रों की सुरक्षा और प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक टकराव को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
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