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बागी सांसदों पर टीएमसी का हमला : लोकसभा स्पीकर को सौंपीं 20 अयोग्यता याचिकाएं

Munesh Kumar Shukla Sat, Jun 20, 2026

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने बागी सांसदों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष को 20 अयोग्यता याचिकाएं सौंप दी हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि संबंधित सांसदों ने जनता के जनादेश और पार्टी के सिद्धांतों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी के टिकट और संगठन के समर्थन के आधार पर जनता ने चुना, वे अब व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक ताकतों के साथ खड़े हो गए हैं।

अभिषेक बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में दल-बदल की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों ने राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ के लिए अपनी "ईमानदारी बेच दी" और जनता द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान किया। टीएमसी का कहना है कि संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है और अब इस पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संसदीय नियमों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि याचिकाएं स्वीकार हो जाती हैं तो संबंधित सांसदों की लोकसभा सदस्यता समाप्त हो सकती है।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ दलों का कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी जनप्रतिनिधि को राजनीतिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, जबकि अन्य दलों ने टीएमसी के कदम को उचित बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हुई हैं।

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