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महाशिवरात्रि : महाशिवरात्रि पर काशी-मुंबई का अद्भुत संगम

Munesh Kumar Shukla Thu, Feb 12, 2026

महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने एक महत्वपूर्ण और विशेष पहल की है। इस बार मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर से भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के लिए फल, फूल और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धा के साथ काशी विश्वनाथ धाम भेजी गई। मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष प्रसाद और पूजन सामग्री बाबा के दरबार में विधिपूर्वक पहुंचाई गई है, जिससे महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व को और भी भव्य और आध्यात्मिक रूप दिया जा सके।विशेष रूप से इस पहल को भगवान श्री गणेश और भगवान महादेव के शाश्वत पिता-पुत्र संबंध की आध्यात्मिक भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। मंदिर न्यास और प्रशासन ने इसे न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है, बल्कि यह देश के प्रमुख तीर्थों के मध्य सांस्कृतिक और धार्मिक समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम भी माना जा रहा है।श्री सिद्धिविनायक मंदिर के डिप्टी सीईओ संदीप राठौर ने कहा कि महाशिवरात्रि जैसे महापर्व पर इस तरह की पहल न केवल भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव को सशक्त बनाती है, बल्कि देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सौहार्द और समन्वय को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने इस नवाचार के माध्यम से भगवान श्री गणेश एवं परमपिता महादेव के पावन संबंध को जनमानस के समक्ष प्रतिष्ठित करने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का विशेष आभार व्यक्त किया।इतिहास के अनुसार, वर्तमान समय में जिस स्वरूप में काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है, उसका निर्माण 1780 में कराया गया था। यह कार्य इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने अपने धर्मपरायण दृष्टिकोण से करवाया था। इसके अतिरिक्त, काशी विश्वनाथ मंदिर के दो प्रमुख गुंबदों को महाराजा रणजीत सिंह ने सोने से ढकवाया था, जो आज भी मंदिर की भव्यता और ऐतिहासिक महत्त्व को दर्शाते हैं।विशेष रूप से महादेव की नगरी में स्थित विश्वनाथ शिवलिंग का इतिहास सदियों पुराना है। इसे लेकर कहा जाता है कि यहाँ के पावन शिवलिंग ने समय-समय पर धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा है। अब, महाशिवरात्रि के अवसर पर सिद्धिविनायक मंदिर से भेजे गए प्रसाद ने इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्तों के उत्साह और श्रद्धा को और भी बढ़ा दिया है।मंदिर न्यास के अधिकारियों ने बताया कि इस बार की पहल के तहत भेजी गई फल, फूल और पूजन सामग्री का वितरण विधिपूर्वक पूजा स्थलों में किया जाएगा, ताकि भक्तगण भी इस धार्मिक आयोजन में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शामिल हो सकें। यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि यह यह दर्शाती है कि देश के प्रमुख तीर्थ स्थल आपस में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से जुड़े हुए हैं।संदीप राठौर ने कहा, "भगवान श्री गणेश और परमपिता महादेव के पावन संबंध को जनमानस के समक्ष स्थापित करने के लिए यह पहल अत्यंत सार्थक है।" उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक समन्वय से देश में धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को भी बल मिलता है।इस प्रकार, महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई यह विशेष पहल भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बन गई है और देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के बीच सहयोग और श्रद्धा की भावना को मजबूती प्रदान कर रही है।