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: योगी सरकार के आदेश तानाशाह बीघापुर तहसीलदार के ठेंगे पर।

admin Tue, Mar 25, 2025

बीघापुर उन्नाव

तहसील बीघापुर में उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया  और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा है ।

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क्या है मुख्यमंत्री के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रूप से कहा है भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त कार्यवाही होगी।

अभी लखनऊ के जिलाधिकारी रहे अभिषेक प्रकाश जो कि वर्तमान में मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट यूपी इन्वेस्ट के कर्ता धर्ता थे को भ्रष्टाचार के मामले में सस्पेंड किया गया ।

तहसील में तैनात तहसीलदार अरसला नाज पर बीघापुर योगी  सरकार के निर्देशों का कोई असर नहीं होता है।

यही नहीं उनकी शासन और जिले के अधिकारियों में पकड़ के चलते उनका कोई भी बाल बांका भी नहीं कर पा रहा है ।

पूरे कार्यकाल में तहसील मुख्यालय में नहीं किया है  प्रवास ।

रोज उन्नाव स्थित आवास से अपनी प्राइवेट गाड़ी से करती है आवागमन ।

लोकसेवक अधिनियम की उड़ा रही है धज्जियां ।

क्या कहती है लोकसेवक नियमावली।

लोकसेवक नियमावली

आमतौर पर उन नियमों, विनियमों और आचार संहिता का संग्रह होती है जो सरकारी कर्मचारियों (लोकसेवकों) के कर्तव्यों, अधिकारों, दायित्वों और सेवा शर्तों को निर्धारित करती है। यह नियमावली विभिन्न सरकारी स्तरों (केंद्र, राज्य, और स्थानीय प्रशासन) पर लागू होती है और संबंधित अधिनियमों एवं सेवा नियमों के अनुसार बनाई जाती है।

लोकसेवक नियमावली के प्रमुख बिंदु:

कर्तव्य और दायित्व

  • ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना।

  • जनहित में निर्णय लेना और सरकारी योजनाओं को लागू करना।

  • संवैधानिक मूल्यों और कानूनों का पालन करना।

3. आचरण संहिता

  • भ्रष्टाचार, पक्षपात और अनुचित प्रभाव से बचना।

  • लोकसेवक के लिए राजनीतिक दलों की गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध।

  • सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सरकारी नीति के खिलाफ टिप्पणी न करना।

अनुशासनात्मक कार्रवाई

  • अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, और कर्तव्य में लापरवाही पर दंडात्मक कार्रवाई।

  • सस्पेंशन, वेतन कटौती, और बर्खास्तगी जैसे प्रावधान।

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कानूनी कार्रवाई।

 

भगवंतनगर नगर पंचायत में प्लाटिंग कारोबारियों की जांच का मामला ?

जांचे दर्जनों बार हुई मगर किसी जांच में किसी प्लाटिंग कारोबारी पर कोई कार्यवाही क्यों  नहीं ?

सवाल उठता है क्या जांचे सिर्फ वसूली के लिए की गई,?

बिहार थाने की भूमि पर तहसीलदार के करीबी  का अवैध निर्माण कर गेस्टहाऊस बनाने का मामला ।

तहसीलदार बीघापुर अरसला नाज स्वयं मौके पर गई थी जिसकी रिपोर्ट भी तैया हुई थी पर इस पर कारवाही क्यों नहीं हुई ?

भूमाफिया पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई  क्योंकि भूमाफिया तहसीलदार का करीबी है और मुस्लिम है

और मैडम ने अपने कार्यकाल में किसी मुस्लिम के खिलाफ कोई भी कार्यवाही न करने का संकल्प कर रखा है भले वह थाने में कब्जा कर ले या तहसील में ।केवल उनकी बिरादरी का है तो सारे खून माफ ।

तहसील परिसर भी असुरक्षित दारूबाजों की शाम होते ही सजती है महफिल ।

एसडीएम के अर्दली विजय सिंह की मोटर साइकिल आवास परिसर से हुई चोरी मगर अब तक कोई कारवाही नहीं हो पाई न मिली मोटरसाइकिल और न मिला चोर ।

ऊंचगांव के मुकदमे में तहसीलदार  ने पुराना दाखिल खारिज बाद खारिज होने के बावजूद दोबारा नया वाद दाखिल कर किया दाखिल खारिज ।

जबकि मामले में नाबालिक पुत्र का हिस्सा भी मां ने बेंच दिया था और पिता के प्रापर्टी में पुत्र को किया अधिकार से वंचित ।

धारा 67 के की मुकदमों में पाटन के मामले में नोटिस वापस कर मुकदमा किया बंद ।

बिहार में चल रहे 35 साल के वाद में  मृतक के नाम भूमि दर्ज करने का दिया आदेश ।

विधिक वारिसों पुत्रों की वरासत को किया खारिज ।

भूमि कीमती थी और कारण पैसा नहीं

मिला ?

लेखपाल को सस्पेंड करने की धमकी देकर लगवाई फर्जी रिपोर्ट ?सरकार का राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण करने के आदेश के बावजूद 4 साल से लंबित दाखिल खारिज मामला लंबित ।50000 की मांग पूरी करो नहीं तो पद और प्रभाव के कारण नहीं होगा दाखिल खारिज।मामला 2021 से है लंबित 4 साल दाखिल खारिज क्यों नहीं हुआ ।

आपत्तिकर्ता का कब्जा अपनी भूमि।

पर क्रेता और विक्रेता के कब्जे वाली खाली भी का तहसीलदार अरसला नाज ने स्वयं अशोक कुमार शुक्ला और स्नेहा यादव नायब तहसीलदार और लेखपाल आनंद सिंह की उपस्थित में किया था लगभग एक वर्ष पूर्व निरीक्षण ।

कानूनगो अजय सिंह को जारी की थी चिट्ठी परंतु आज तक कानूनगो ने नहीं लगाई रिपोर्ट ।

लेखपाल ने किस आदेश से लगाई रिपोर्ट ।

लेखपाल पर दबाव बनवाकर लगवाई रिपोर्ट जिसमें आपत्तिकर्ता का कब्जा अपनी भूमि पर।

लेखपाल पति पत्नी सुनील और बंदना को  बनाया दावेदार जो अपनी भूमि भूमि और मकान दुकान पर है पहले से काबिज और उपरोक्त वाद में नहीं है आपत्तिकर्ता ।

तहसीलदार द्वारा सुविधाशुल्क न देने के कारण नहीं किया जा रहा दाखिल।

पीड़ित ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर लगाई न्याय की गुहार ।

         

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