हार्ट एक्सपर्ट : हार्ट एक्सपर्ट का चेतावनी: बच्चों की स्क्रीनिंग जरूरी लखनऊ में लेजर से होगा इलाज
Munesh Kumar Shukla Tue, Feb 17, 2026
सडेन कार्डियक डेथ के मामले बच्चों में दुर्लभ हैं, लेकिन इससे बचाव संभव है। इसके लिए विशेषज्ञों का कहना है कि फोकस स्क्रीनिंग पर होना चाहिए। खासकर उन परिवारों के बच्चों और करीबी सदस्यों की जांच जरूरी है, जिनके माता-पिता, भाई-बहन या दादा-दादी को युवा उम्र में सडेन कार्डियक डेथ का सामना करना पड़ा हो। KGMU के लारी कार्डियोलॉजी विभाग के फैकल्टी डॉ. प्रवेश विश्वकर्मा ने बताया कि स्क्रीनिंग से यह पता लगाया जा सकता है कि परिवार में कोई हार्ट की जेनेटिक बीमारी तो नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों में सांस फूलना, तेज धड़कन या पैरों में सूजन जैसी शिकायतों पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसे बच्चों को एक्सपर्ट कार्डियोलॉजिस्ट के पास चेकअप के लिए ले जाना चाहिए। डॉ. प्रवेश ने बताया कि सडेन डेथ हमेशा हार्ट अटैक की वजह से नहीं होती, कभी-कभी ब्रेन संबंधी समस्याएं भी कारण बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया कार्डियोलॉजी सोसाइटी की KGMU में हाल ही में हुई स्टेट कॉन्फ्रेंस में देशभर के करीब 200 हार्ट स्पेशलिस्ट ने इस बढ़ते खतरे पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने इस पर जोर दिया कि रोकथाम के लिए सबसे ज्यादा फोकस स्क्रीनिंग और जीवनशैली सुधार पर होना चाहिए। लारी कार्डियोलॉजी विभाग में जल्द ही अत्याधुनिक लेजर तकनीक शुरू की जाएगी, जिसकी लागत करीब 5 करोड़ रुपए है। यह तकनीक दिल की बंद नसों को खोलने में मदद करेगी और कई मामलों में मेटल स्टेंट लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश का यह पहला सरकारी लेजर होगा। इसकी मदद से नसों में जमा कैल्शियम की सख्त परत हटाना आसान होगा, जिससे भविष्य में ब्लॉकेज और जटिलताओं का खतरा कम होगा।
डॉ. सेठी ने कहा कि इस तकनीक से पहले से लगे गैर जरूरी स्टेंट को भी बिना शरीर को नुकसान पहुंचाए निकाला जा सकता है। अनुमान है कि करीब 10-15% मरीजों को इससे विशेष लाभ मिलेगा। यह सुविधा लखनऊ में सरकारी और निजी संस्थानों में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे शुरू करना मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
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