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लखनऊ : लखनऊ में सीएसआई टावर लिफ्ट कांड में नया मोड़

Munesh Kumar Shukla Wed, Feb 18, 2026

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सीएसआई टावर में हाल ही में हुए लिफ्ट हादसे को लेकर ठेकेदार और प्राधिकरण के बीच विवाद गरमाया है। निरीक्षण के दौरान ठेकेदार असलम आगा ने एलडीए को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लिफ्ट गिरने की घटना वास्तविक रूप में नहीं हुई थी।17 फरवरी को एलडीए के मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह को लिखे पत्र में ठेकेदार ने दावा किया कि लिफ्ट झटके ले रही थी, लेकिन इसका कारण अस्थायी बिजली कनेक्शन के चलते वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होना था। इसी दौरान लिफ्ट की सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई और लिफ्ट स्वतः रुक गई। ठेकेदार ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रणाली काम न करती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन लिफ्ट पूरी तरह नीचे नहीं गिरी।ठेकेदार ने पत्र में यह भी कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल लिफ्ट की आपूर्ति और स्थापना तक सीमित थी। अभी तक लिफ्ट का विधिवत कमिश्निंग और हैंडिंग ओवर नहीं हुआ है। स्थायी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराना एलडीए की जिम्मेदारी थी, जो नहीं दिया गया। अगर स्थायी कनेक्शन समय पर मिलता तो लिफ्ट में यह समस्या नहीं आती।वहीं, एलडीए की ओर से वीसी प्रथमेश कुमार और मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह ने बयान दिया है कि लिफ्ट झटके के साथ नीचे की ओर गिरती रही और बीच में अटक गई। उन्होंने कहा कि यदि लिफ्ट बीच में अटकी नहीं होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। वीसी प्रथमेश कुमार ने 13 फरवरी को अधिकारियों के साथ लिफ्ट का निरीक्षण भी किया था।अब इस मामले में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब लिफ्ट का औपचारिक हैंडिंग ओवर नहीं हुआ और स्थायी बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध नहीं था, तो निरीक्षण और परीक्षण किस आधार पर किया गया। एलडीए और ठेकेदार दोनों ही अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करने में जुटे हुए हैं। इस विवाद ने लिफ्ट सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया में खामियों को भी उजागर किया है।विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रणाली का काम करना ठीक है, लेकिन जिम्मेदारी के स्पष्ट निर्धारण और औपचारिक परीक्षण के बिना निरीक्षण करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। इस घटना ने टावर परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों और निरीक्षण प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सुरक्षा विशेषज्ञों और निर्माण इंजीनियरों का सुझाव है कि आगे से ऐसे सभी टावर और ऊंची इमारत परियोजनाओं में लिफ्ट की स्थापना और परीक्षण की प्रक्रिया को और भी अधिक कड़ा किया जाए। इसमें स्थायी बिजली कनेक्शन, कमिश्निंग, हैंडिंग ओवर और नियमित निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। यह कदम न केवल भविष्य में हादसों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि ठेकेदार और प्राधिकरण के बीच जिम्मेदारी विवाद को भी कम करेगा। इसके साथ ही, लिफ्ट संचालन में आने वाले किसी भी तकनीकी या सुरक्षा संबंधित खतरों की समय पर पहचान और समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।