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लखनऊ : “विभाजनकारी शक्तियों पर सख्त रुख: सीएम योगी बोले—एकता के खिलाफ किसी साजिश को नहीं उठने देंगे

Munesh Kumar Shukla Sun, Feb 1, 2026

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बाराबिरवा, कानपुर रोड स्थित संत रविदास मठ में संत रविदास जी की प्रतिमा व सभागार का लोकार्पण किया। सीएम योगी ने कहा कि संत रविदास का प्रकटीकरण 649 वर्ष पहले काशी के सीर गोवर्धन में हुआ था। इतने वर्षों के बाद भी उनकी दिव्य आभा से आलोकित होकर यह समाज 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के निर्माण की दिशा में बढ़ रहा है। संत रविदास का जब धराधाम पर प्रकटीकरण पर हुआ, तब देश विदेशी आक्रांताओं से त्रस्त था। उन्होंने उस समय भी साधना की पवित्रता और उसे कर्म की साधना के रूप में बदलने का कार्य किया था। उन्होंने प्रत्येक नागरिक को वैष्णव परंपरा के अनुरूप जिस उपासना के लिए प्रेरित किया, वह जीवन में कर्म की प्रधानता, मन की शुद्धता को महत्व देता है और लोककल्याण के प्रति आग्रही बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के मन में महापुरुषों, संतों के प्रति मन में श्रद्धा व आदर का भाव होना चाहिए। विभाजनकारी ताकतें बांटेंगी, लेकिन गुलामी कालखंड का स्मरण करते हुए उन्हें सिर उठाने का अवसर नहीं देना है। उन्होंने कहा कि संतों की दिव्य साधना से प्राप्त सिद्धि का प्रतिफल देश को मिलेगा। हम सभी को देश की एकता व संप्रभुता के लिए एकजुट होकर कार्य करना होगा। प्रदेश में सनातन धर्म से जुड़े धर्मस्थलों-महर्षि वाल्मीकि का लालापुर, संत तुलसीदास का राजापुर, मां विंध्यवासिनी धाम, चित्रकूट, अयोध्या, शुकतीर्थ, नैमिषारण्य, मथुरा-वृंदावन, भगवान बुद्ध से जुड़े बौद्ध सर्किट समेत लगभग 1200-1500 स्थानों के पुनरोद्धार के कार्य किए गए। मुख्यमंत्री योगी ने समाज में भेदभाव का आरोप लगाने वालों को भी आईना दिखाया। बोले- "जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने समाज को जोड़ने के लिए मध्य काल में अलग-अलग जातियों से 12 शिष्य बनाए। समाज को जोड़ने का जितना बड़ा कार्य उस कालखंड में संतों ने किया, वह अद्भुत था। वर्तमान भारत का निर्माण उसी नींव पर हुआ है। गुलामी के बंधन को तोड़ने में वही हमारी प्रेरणा रही है।" सीएम योगी ने कहा कि संत रविदास ने प्रेरणा दी कि ऐसा राज होना चाहिए, जहां सभी को अन्न प्राप्त हो, कोई भूखा न सोए। हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिले। संत की वाणी कभी व्यर्थ नहीं होती। संत रामानंद से दीक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कर्म साधना के माध्यम से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।