6 महीने टला फैसला : मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता पर रोक
Munesh Kumar Shukla Mon, Apr 27, 2026
मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले को फिलहाल छह महीने के लिए टाल दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने पहले 1 मई से इस नियम को लागू करने का ऐलान किया था, लेकिन बढ़ते विरोध के बाद इसे स्थगित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, इस दौरान मराठी और गैर-मराठी चालकों का सत्यापन जारी रहेगा।
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पहले कहा था कि सभी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखना अनिवार्य होगा और ऐसा न करने पर उनके परमिट रद्द किए जा सकते हैं। इस घोषणा के बाद राज्य में मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद फिर से उभर आया था।
इस मुद्दे पर कई राजनीतिक बयान भी सामने आए। अमित ठाकरे ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि मराठी अनिवार्यता का विरोध करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। वहीं, विपक्षी नेताओं ने भाषा के नाम पर आक्रामक रवैये का विरोध किया।
इम्तियाज जलील ने कहा कि मराठी सीखना जरूरी है, लेकिन इसे जबरदस्ती या दबाव के जरिए लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि भाषा सिखाने के लिए सकारात्मक और प्रभावी तरीके अपनाए जाने चाहिए।
सरकार अब ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी सिखाने हेतु प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार कर रही है। इसमें पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि सामान्य बोलचाल पर जोर दिया जाएगा। मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद इस पहल में सहयोग करेंगे।
गौरतलब है कि यह नियम महाराष्ट्र दिवस (1 मई) से लागू किया जाना था, जिसमें ओला-उबर जैसे ऐप-आधारित सेवाओं के चालकों को भी मराठी में यात्रियों से संवाद करना अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित था। फिलहाल सरकार इस फैसले को टालकर संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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