जी-7 में यूक्रेन और ईरान मुद्दे पर मंथन : मोदी समेत वैश्विक नेताओं की अहम बैठक
Munesh Kumar Shukla Wed, Jun 17, 2026
फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। भारत को लगातार आठवें वर्ष इस महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर आमंत्रित किया गया है, जिसे विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन के दौरान उनकी कई प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें निर्धारित हैं। विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य शुक्रवार तक पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का विस्तृत विवरण जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करे और न ही अपने पास रखे।
ट्रंप ने बताया कि समझौते में ईरान की ओर से परमाणु हथियारों के विकास पर स्पष्ट प्रतिबद्धता दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते को समीक्षा के लिए अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष रखा जा सकता है। उनके अनुसार यह कदम समझौते को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में मदद करेगा।
उधर, जी-7 देशों के नेताओं ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भी व्यापक चर्चा की। फ्रांस के एक राजनयिक सूत्र के अनुसार सदस्य देशों ने यूक्रेन के प्रति अपना समर्थन जारी रखने और रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करने के लिए तेल और गैस क्षेत्र से जुड़े अतिरिक्त प्रतिबंधों की संभावनाओं पर भी विचार किया।
विश्लेषकों का मानना है कि जी-7 सम्मेलन में लिए जाने वाले निर्णय आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में सम्मेलन से निकलने वाले संदेशों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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