‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच उद्धव का शक्ति प्रदर्शन : शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें तेज
Munesh Kumar Shukla Wed, Jun 17, 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट और कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर अटकलों का दौर जारी है। इसी बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर संगठन में एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया। हालांकि बैठक के बाद सामने आई विभिन्न जानकारियों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे ने सांसदों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि वे किसी पर भी पार्टी में बने रहने का दबाव नहीं डालेंगे और जो भी निर्णय लेगा, उसके बेहतर भविष्य की कामना करेंगे। ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी बगावत का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी उन्हें घटनाक्रम की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी को रोकने या दबाव बनाने की कोशिश नहीं की।
सूत्रों के मुताबिक ठाकरे ने कहा कि चार वर्ष पहले 40 विधायक पार्टी छोड़कर चले गए थे और उस समय भी उन्हें स्थिति का अंदाजा था। उन्होंने नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा वाली शिवसेना से अलग हुए हैं, उन्हें भविष्य में अपने फैसले पर पछतावा हो सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और सांसदों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं और समय आने पर पार्टी फिर मजबूत स्थिति में लौटेगी।
हालांकि बैठक के बाद सामने आई खबरों को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि उद्धव ठाकरे ने नेताओं को पार्टी छोड़ने की खुली छूट दे दी है। राउत ने कहा कि बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए रणनीति तैयार करना था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों और संभावित दल-बदल की चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व लगातार अपने सांसदों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं विपक्षी दल इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
विज्ञापन