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11th December 2025

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आतंकी हमला ।देश में आक्रोश : पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूँछकर ली 27 हिंदुओं की जान ।कायरता की पराकाष्ठा ।

जम्मू कश्मीर

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आज आतंकवादियों ने आए हुए पर्यटकों को निशाना बनाते हुए 27 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी ।

यही नहीं आतंकियों द्वारा की गई टारगेट किलिंग का आलम यह रहा कि उन्होंने लोगों की पैंट उतरवा कर गोली मारी जो निहायत दरिंदगी की पराकाष्ठा है जिससे पूरे देश में भारी आक्रोश है ।

जनता देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से तुरंत बदला लेने की गुहार लगा रही है यही नहीं पूरे देश उबाल है ।

लोग सड़कों में निकल कर आतंकवादियों द्वारा की गई कायराना दरिंदगी को लेकर उबल रहे है और अपना।विरोध प्रकट कर रहे है घटना के तुरन्त बाद देश के गृहमंत्री अमित शाह और मनोज सिन्हा श्रीनगर पहुंच चुके है।

यही नहीं मोदी भी विदेश यात्रा से वापसी के लिए निकल चुके है सेना ने अपना आपरेशन शुरू कर दिया है ।

अब तो बस जनता इंसाफ मांग रही है कड़ी कार्यवाही का ।

आक्रोश की आग – पहलगाम की पुकार

धर्म का नाम लेकर चला दी बंदूक,

इंसानियत की कब्र में गूँजता सुक…

पहलगाम की वादियाँ चीख़ उठीं आज,

ज़मीर रो पड़ा, सन्नाटा है लाज।

क्या था गुनाह उसका, जो पूँछा गया नाम?

क्या उसके जवाब में था गोली का इनाम?

ना शस्त्र था उसके पास, ना कोई जंग,

फिर क्यों धर्म बना उसकी मौत का रंग?

ईश्वर, अल्लाह, गुरुवाणी या वेद,

सब कहते हैं – करुणा है सबसे बड़ी भेंट।

पर बंदूकों से जो लिखते हैं धर्म की परिभाषा,

वो इंसान नहीं, हैं नफ़रत की अभिलाषा।

पहलगाम की हवा आज लहू से सनी,

पेड़ों ने भी काँप के आँखें भरीं।

माँओं की गोदें सुनी, घरों में मातम,

क्या यही है धर्म का असली धरम?

हम चुप रहे तो अगला निशाना कौन होगा?

आज नाम पूँछा गया, कल साँसें गिनी जाएँगी क्या?

उठो! ये वक़्त है आवाज़ बनने का,

हर मज़हब से पहले, इंसान कहे जाने का।

अब न झुकेगा सिर, न सहेंगे वार,

एकजुट हो चलेंगे, बनके प्रतिकार।

धर्म नहीं सिखाता मारो किसी को,

ये आतंकी हैं, धर्म से दूर इनका मुखौटा फिको।

पहलगाम! तुझसे वादा है हमारा,

तेरे आँसुओं का बदला होगा नारा।

नफ़रत के सौदागरों से निपटने का वक्त है,

इंसानियत जिंदा है – ये आख़िरी सच है।

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