Advertisment

26 जनवरी 2026 से e paper tv भारतवर्ष पढ़े हर रोज

18th February 2026

BREAKING NEWS

TV Bharatvarsh E Paper 19-02-2026

TV Bharatvarsh E Paper 18-02-2026

असम में कांग्रेस में उथल-पुथल, भूपेन कुमार बोराह का इस्तीफा

मुंगेर में नक्सली कमांडर सुरेश कौड़ा ने किया सरेंडर

लखनऊ में मांझे से गर्दन कटने के मामले में FIR

भारत-रूस : भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी से वैश्विक बाजार को मजबूती

Munesh Kumar Shukla Wed, Feb 18, 2026

अंतर्राष्ट्रीय, टीवी भारतवर्ष

रूस का विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के हालिया दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में जारी सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी पूरी तरह से पारस्परिक हितों पर आधारित है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कुछ पश्चिमी देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। रूस का कहना है कि भारत के साथ उसका ऊर्जा सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप है और इसमें किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि शामिल नहीं है। बयान में यह भी जोड़ा गया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव में है, ऐसे में स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।भारत और रूस के बीच तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में सहयोग लगातार बढ़ा है। रूस, भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक अनुबंधों और रियायती दरों पर तेल आपूर्ति की व्यवस्था ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी है, वहीं रूस को भी अपने ऊर्जा निर्यात के लिए एक बड़ा और स्थिर बाजार मिला है।रूस के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ऊर्जा को राजनीतिक दबाव का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग, संवाद और संतुलित नीतियों की आवश्यकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-रूस ऊर्जा सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का संतुलन बना रहता है, जिससे तेल की कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी एशियाई और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।